Responsive Full Width Slider

हाईकोर्ट ने बीसीए को विज्ञान की स्नातक डिग्री माना

By Tamishree Mukherjee

Published :

Follow

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) की डिग्री को विज्ञान स्ट्रीम की स्नातक डिग्री माना है। कोर्ट ने वर्ष 2014 से पहले हासिल की गई बीसीए डिग्री को भी विज्ञान स्नातक की योग्यता के तौर पर माना है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भर्ती में यदि कला, विज्ञान या वाणिज्य में स्नातक की डिग्री मांगी गई है, तो केवल इस आधार पर बीसीए डिग्रीधारी की उम्मीदवारी खारिज नहीं की जा सकती कि उसकी डिग्री 2014 से पहले की है।

यह भी पढ़े : 14 वीं जेपीएससी में गड़बड़ी का मामला शीर्ष कोर्ट पहुंचा

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर दो अपीलों पर सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। दोनों मामले शारीरिक शिक्षा विषय में ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी) की नियुक्ति से जुड़े थे। कोर्ट के इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को भी राहत मिली है, जिन्होंने 2014 से पहले बीसीए की डिग्री हासिल की है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतेश वत्स ने बहस की।

2014 की यूजीसी अधिसूचना ने नई व्यवस्था नहीं बनाईः राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से दलील दी गई थी कि वर्ष 2014 की यूजीसी अधिसूचना से पहले बीसीए को किसी विशेष स्ट्रीम में नहीं रखा गया था। इसलिए वर्ष 2014 से पहले बीसीए करने वाले अभ्यर्थियों को विज्ञान स्नातक की योग्यता का लाभनहीं दिया जा सकता। खंडपीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2014 की यूजीसी अधिसूचना नई डिग्री या नई योग्यता लागू करने वाली अधिसूचना नहीं थी, बल्कि पहले से मान्य बीसीए डिग्री की स्ट्रीम को स्पष्ट करने वाली थी। इसलिए इसे केवल 2014 के बाद हासिल की गई बीसीए डिग्री तक सीमित नहीं किया जा सकता।

2009 में ही यूजीसी ने बीसीए को मान्यता दी थीः कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2009 की यूजीसी अधिसूचना में बीसीए को यूजीसी अधिनियम की धारा 22 के तहत मान्यता प्राप्त डिग्री के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। वर्ष 2014 की अधिसूचना में उसी डिग्री को विज्ञान स्ट्रीम में रखा गया। इसका मतलब यह नहीं है कि 2014 में बीसीए को पहली बार विज्ञान की डिग्री बनाया गया, बल्कि उसकी स्ट्रीम को स्पष्ट किया गया। खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी प्रावधान की प्रकृति यदि स्पष्टकारी या सुधारात्मक हो, तो उसका उद्देश्य पहले से मौजूद स्थिति को स्पष्ट करना भी हो सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने 2014 की अधिसूचना का लाभपुराने बीसीए डिग्रीधारियों को भी देने की बात कही।

अधिक अंक होने पर भी उम्मीदवारी खारिज उचित नहीं

कोर्ट ने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी भर्ती विज्ञापन में निर्धारित सभी योग्यताएं पूरी करता है और उसके अंक अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थी से अधिक है, तो केवल उसकी बीसीए डिग्री को आधार बनाकर उसे नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने यह भी ध्यान दिया कि दोनों अभ्यर्थियों ने 10+2 की पढ़ाई विज्ञान स्ट्रीम से की थी। ऐसे में बीसीए को विज्ञान स्ट्रीम की स्नातक डिग्री मानने से उन्हें निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करने वाला अभ्यर्थी माना जाएगा।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---