सोशल संवाद / डेस्क : दिल्ली में स्कूली छात्राओं को बांटी जा रही साइकिलों को लेकर आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर दिल्ली सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि सरकार ने जिस महंगे हीरो स्काइलर 26T मॉडल की साइकिल का टेंडर किया था, उसकी जगह उसी कीमत पर सस्ता हीरो बोन फायर मॉडल दिया जा रहा है।

सौरभ भारद्वाज ने गुरुवार को सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि टेंडर एक मॉडल के नाम पर किया गया, लेकिन सप्लाई में दूसरा मॉडल दिया जा रहा है। उन्होंने इसे समझाने के लिए आईफोन का उदाहरण भी दिया। उनका कहना था कि अगर सरकार ने आईफोन 17 प्रो मैक्स का टेंडर किया हो और ठेकेदार उसी कीमत पर आईफोन 14 देने लगे तो सरकार को इसे स्वीकार नहीं करना चाहिए।
स्काइलर और बोन फायर मॉडल को लेकर सवाल
भारद्वाज के मुताबिक, टेंडर में हीरो स्काइलर 26T मॉडल का उल्लेख किया गया था। उनके दावे के अनुसार स्काइलर मॉडल में सात गियर, डिस्क ब्रेक और फ्रंट सस्पेंशन जैसे फीचर होते हैं। वहीं, छात्राओं को बांटी जा रही साइकिलों में ये फीचर नहीं हैं। आप नेता का दावा है कि ये साइकिलें असल में बोन फायर मॉडल की हैं, जिन पर स्काइलर का स्टिकर लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार करीब एक लाख 30 हजार साइकिलें खरीद रही है और प्रति साइकिल करीब 6,957 रुपये की कीमत बताई गई है। भारद्वाज ने दावा किया कि बोन फायर मॉडल की कीमत इससे काफी कम है और इसी अंतर को लेकर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा है।
सरकार से मॉडल स्पष्ट करने की मांग
सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद से सवाल किया कि आखिर छात्राओं को कौन-सा मॉडल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने स्काइलर मॉडल का टेंडर किया था, तो सप्लाई की जा रही साइकिल में स्काइलर के सभी फीचर होने चाहिए।
आप नेता ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में केवल यह कह रही है कि टेंडर प्रक्रिया के तहत सबसे कम कीमत वाली बोली को मंजूरी दी गई थी। भारद्वाज का कहना है कि असली सवाल कीमत का नहीं, बल्कि टेंडर में तय मॉडल और सप्लाई किए जा रहे मॉडल के बीच अंतर का है।
साइकिल खरीद में गड़बड़ी का लगाया आरोप
भारद्वाज ने पहले भी इस खरीद प्रक्रिया को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि महंगे स्काइलर मॉडल के नाम पर कम कीमत वाले बोन फायर मॉडल की साइकिलें दी जा रही हैं और इससे सरकारी खजाने को नुकसान हो सकता है। हालांकि, ये आरोप सौरभ भारद्वाज और आम आदमी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।









