सोशल संवाद / रांची : झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अब नया विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा पास कर नौकरी हासिल कर चुके अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में नियुक्त अभ्यर्थी रांची के प्रोजेक्ट भवन पहुंचे और धरने पर बैठकर अपनी नियुक्ति और भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

नियुक्त अभ्यर्थियों ने पूछा- हमारा क्या दोष?
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की और इसके बाद उन्हें नियुक्ति मिली। अब पूरी परीक्षा रद्द किए जाने से उनकी नौकरी और भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि अगर भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन कथित अनियमितताओं के लिए उन अभ्यर्थियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की है।
सरकार के फैसले के खिलाफ धरना
JSSC-CGL रद्द होने के बाद नियुक्त अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन में प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से अपना फैसला वापस लेने और उनकी नियुक्तियों को सुरक्षित रखने की मांग की है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
1975 नियुक्त अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल
रिपोर्टों के मुताबिक JSSC-CGL के जरिए करीब 1975 युवाओं को नियुक्तियां मिली थीं। परीक्षा रद्द होने के बाद इन कर्मचारियों के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग उठ रही है, तो दूसरी तरफ नियुक्त अभ्यर्थी अपनी नौकरी बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
हेमंत सोरेन सरकार ने रद्द की JSSC-CGL परीक्षा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी। इसके साथ ही सरकार ने TDPL के माध्यम से 2014 से अब तक आयोजित सभी संबंधित परीक्षाओं, परिणामों और नियुक्तियों को भी रद्द करने का फैसला लिया है। यह निर्णय भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे लंबे छात्र आंदोलन के बाद लिया गया।
सरकार के इस फैसले का आंदोलनरत छात्रों के एक वर्ग ने स्वागत किया है, लेकिन अब नियुक्त अभ्यर्थियों के विरोध ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती
JSSC-CGL रद्द करने के बाद सरकार के सामने एक ओर आंदोलनरत छात्रों की मांगों को पूरा करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा पास कर नियुक्त हुए अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर समाधान निकालना भी जरूरी हो गया है।
ऐसे में अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है कि नियुक्त अभ्यर्थियों की आपत्ति पर क्या फैसला लिया जाता है और परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच किस तरह आगे बढ़ती है।









