सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लोगों के बीच बनी असमंजस की स्थिति को दूर करने के लिए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने अहम जानकारी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि किसी मतदाता को अगर नोटिस मिला है तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि उसका नाम सीधे मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।

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दरअसल, SIR के दौरान मतदाता सूची में सामने आ रही विसंगतियों और दस्तावेजों से जुड़ी आपत्तियों की जांच की जा रही है। इसी प्रक्रिया के तहत कुछ मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं।
24 अगस्त से शुरू होगी सुनवाई
नोटिस से जुड़े मामलों पर 24 अगस्त से सुनवाई शुरू होगी। जिन लोगों को नोटिस मिला है, उन्हें अपनी बात रखने और जरूरी दस्तावेज या जानकारी उपलब्ध कराने का मौका दिया जाएगा।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को सही करना है, ताकि योग्य मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहें और सूची में मौजूद गलतियों को दूर किया जा सके।
नोटिस मिलने पर क्या करें?
अगर आपको SIR के तहत नोटिस मिला है तो सबसे पहले उसमें दी गई जानकारी और सुनवाई की तारीख को ध्यान से देखें। तय तारीख पर संबंधित अधिकारी के सामने अपना पक्ष रखें और मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराएं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और नोटिस को लेकर अनावश्यक रूप से परेशान न हों।
वोटर लिस्ट में नाम है तो क्यों आया नोटिस?
SIR के दौरान अलग-अलग रिकॉर्ड और उपलब्ध जानकारी का मिलान किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में जहां किसी तरह की जानकारी में अंतर या संदेह सामने आता है, वहां संबंधित मतदाता को नोटिस देकर उसका पक्ष जानने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
इसलिए नोटिस को अंतिम फैसला न समझें। सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
मतदाताओं के लिए जरूरी बात
अगर आपको भी वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण से जुड़ा नोटिस मिला है, तो उसे नजरअंदाज न करें। नोटिस में दी गई तारीख और निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करें। किसी भी तरह की शंका होने पर संबंधित निर्वाचन कार्यालय से जानकारी लेना बेहतर रहेगा।









