सोशल संवाद/डेस्क : गणेश चतुर्थी का त्योहार आते ही मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में गणपति बप्पा की तैयारियां तेज हो जाती हैं। इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। गणेशोत्सव से पहले गणपति मंडलों के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है।

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दरअसल, प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी गणेश मूर्तियों के विसर्जन को लेकर हाईकोर्ट ने फिलहाल पिछले साल के नियमों को ही जारी रखने का फैसला किया है। इससे बड़ी गणेश प्रतिमाएं स्थापित करने वाले मंडलों को कुछ राहत मिली है।
बड़ी मूर्तियों के विसर्जन को लेकर राहत
कोर्ट के आदेश के मुताबिक, 6 फीट से ज्यादा ऊंची POP की गणेश मूर्तियों का विसर्जन फिलहाल प्राकृतिक जल निकायों में किया जा सकेगा।
इसका मतलब है कि बड़ी POP मूर्तियों को लेकर गणपति मंडलों को इस साल अलग से नई व्यवस्था नहीं करनी पड़ेगी। हालांकि, यह अनुमति फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तौर पर है।
6 फीट तक की मूर्तियों के लिए क्या नियम है?
अगर POP से बनी गणेश मूर्ति 6 फीट या उससे छोटी है, तो उसका विसर्जन प्राकृतिक तालाब, नदी या अन्य जल निकाय में नहीं किया जा सकेगा।
ऐसी मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाब या कृत्रिम झील में ही करना होगा।
यानी इस साल मूर्ति की ऊंचाई के हिसाब से विसर्जन की व्यवस्था तय होगी।
सरल भाषा में समझें:
- 6 फीट या उससे छोटी POP मूर्ति → कृत्रिम तालाब में विसर्जन
- 6 फीट से बड़ी POP मूर्ति → फिलहाल प्राकृतिक जल निकाय में विसर्जन की अनुमति
महाराष्ट्र सरकार ने कोर्ट का रुख क्यों किया?
POP मूर्तियों के विसर्जन को लेकर पहले से अदालत में मामला चल रहा है। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया कि पिछले साल के कौन से अंतरिम निर्देश इस साल लागू रहेंगे।
इसके बाद जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की पीठ ने 24 जुलाई 2025 के आदेश में तय दिशा-निर्देशों को फिलहाल जारी रखने की बात कही।
अंतिम फैसला अभी बाकी
यहां एक बात समझना जरूरी है कि हाईकोर्ट का यह अंतरिम फैसला अंतिम फैसला नहीं है। POP मूर्तियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए या नहीं, इस पर अदालत का अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।
अंतिम फैसला आने तक मौजूदा दिशा-निर्देश लागू रहेंगे।
POP मूर्तियों को लेकर क्यों उठते हैं सवाल?
POP से बनी मूर्तियों को लेकर मुख्य चिंता इनके विसर्जन के बाद जल प्रदूषण को लेकर होती है। POP पानी में आसानी से नहीं घुलता, इसलिए पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए इसके इस्तेमाल और विसर्जन को नियंत्रित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश से गणेशोत्सव 2026 में मुंबई के गणपति मंडलों को कुछ राहत जरूर मिली है। अब सभी की नजरें इस मामले में आने वाले अंतिम फैसले पर रहेंगी।









