Responsive Full Width Slider

Maharashtra Marathi Rule: कैब ड्राइवर्स ने हाई कोर्ट में दी चुनौती, मराठी ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले पर रोक की मांग

By Sanjana Das

Published :

Follow
Maharashtra Marathi Rule: कैब ड्राइवर्स ने हाई कोर्ट में दी चुनौती, मराठी ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले पर रोक की मांग

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद/डेस्क : महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने के राज्य सरकार के फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।

यह भी पढे : Nepal Flood: क्या होता है GLOF, कैसे अचानक आती है तबाही वाली बाढ़? समझिए पूरी कहानी

चार ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों ने याचिका दाखिल कर सरकार की 12 अगस्त की अधिसूचना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट से जोड़ने पर सवाल

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मराठी भाषा के ज्ञान को ड्राइविंग लाइसेंस, बैज या परमिट हासिल करने अथवा बनाए रखने की शर्त बनाना मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

उन्होंने यह भी दावा किया है कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

याचिका में उन प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है, जिनके तहत मराठी का व्यावहारिक ज्ञान साबित नहीं करने पर ड्राइवर का बैज पहले निलंबित और लगातार नियम का पालन नहीं करने पर रद्द किया जा सकता है।

ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर असर का दावा

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कहा है कि इस नियम का असर बड़ी संख्या में कमर्शियल वाहन चालकों की आजीविका पर पड़ सकता है। खासकर दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र में आकर कैब और ऑटो चलाने वाले ड्राइवरों के लिए यह नियम बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है।

12 अगस्त को बदले गए मोटर व्हीकल नियम

महाराष्ट्र सरकार ने 12 अगस्त को महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स रूल्स में संशोधन किया था। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक मीटर वाले ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित मोटर कैब ड्राइवरों के लिए मराठी का कार्यसाधक यानी working knowledge जरूरी किया गया।

नियमों में यह भी प्रावधान है कि उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस से जुड़ी अनुमति या बैज को निलंबित किया जा सकता है। लगातार नियमों का पालन नहीं करने पर इसे रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है।

सरकार बोली- 1989 से है नियम

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने पिछले सप्ताह कहा था कि महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी का व्यावहारिक ज्ञान रखने की शर्त वर्ष 1989 से मौजूद है, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया जा रहा था।

उन्होंने सोमवार को स्पष्ट किया कि 12 अगस्त के फैसले के तहत जिन ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी का कामचलाऊ ज्ञान नहीं है, उन्हें RTO की ओर से एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें मराठी सीखने का मौका मिलेगा।

20 अगस्त से शुरू हुआ राज्यव्यापी अभियान

महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से राज्यभर में अभियान शुरू किया है। इसके तहत गैर-मराठी भाषी ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के मराठी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान की जांच की जा रही है।

सरकार के अनुसार, 105 दिन चले ‘हिंदूहृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान’ के दौरान 1,65,601 गैर-मराठी भाषी ऑटो और टैक्सी ड्राइवर मराठी का कार्यसाधक ज्ञान सीखने के लिए आगे आए।

अब इस पूरे मामले पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि अदालत को यह तय करना है कि राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए मराठी भाषा संबंधी नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर क्या अंतरिम राहत दी जानी चाहिए।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

संबंधित पोस्ट