सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में आदिवासी जमीन के हस्तांतरण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) के तहत आदिवासी जमीन को संरक्षण देने वाली व्यवस्था को बरकरार रखा है। इस फैसले से आदिवासी जमीन के अधिकार और उसके हस्तांतरण से जुड़े मामलों में कानून की अहमियत एक बार फिर सामने आई है।

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CNT Act का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय की जमीन को गैर-आदिवासियों के हाथों में जाने से बचाना है। कानून के तहत आदिवासी जमीन के हस्तांतरण पर कई तरह की कानूनी पाबंदियां लागू हैं। ऐसे मामलों में जमीन के ट्रांसफर के लिए तय कानूनी प्रक्रिया और सक्षम अधिकारी की अनुमति जरूरी होती है।
हाईकोर्ट के फैसले से साफ है कि आदिवासी जमीन से जुड़े मामलों में CNT Act के प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट पहले भी ऐसे मामलों में आदिवासी जमीन की सुरक्षा को कानून की मूल भावना से जोड़कर देखता रहा है। मई 2026 में भी झारखंड हाईकोर्ट ने एक मामले में CNT Act के प्रावधानों के आधार पर आदिवासी जमीन के पुराने हस्तांतरण को लेकर अहम फैसला सुनाया था।
झारखंड में CNT Act के तहत जमीन की खरीद-बिक्री को लेकर लंबे समय से विवाद और कानूनी मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला आदिवासी जमीन के मालिकाना हक और उसके हस्तांतरण से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।









