सोशल संवाद / झारखंड : झारखंड में कैंसर मरीजों के इलाज को बेहतर बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। राज्य में छह स्थानों पर रेडिएशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही कैंसर मरीजों के लिए डे-केयर कीमोथेरेपी सुविधा भी बहाल की जाएगी।
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इन सुविधाओं को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की योजना है। रांची सदर अस्पताल के अलावा धनबाद, जमशेदपुर, पलामू, हजारीबाग और दुमका स्थित मेडिकल कॉलेजों में रेडिएशन और डे-केयर से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
स्वास्थ्य विभाग की बैठक में बनी योजना
इस योजना को लेकर शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में राज्य में कैंसर मरीजों को बेहतर और स्थानीय स्तर पर इलाज उपलब्ध कराने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
अपर मुख्य सचिव ने जिला स्तर पर कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की समीक्षा की। साथ ही जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मौजूद संसाधनों, मशीनों और मानवबल का आकलन कर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया।
आधुनिक LINAC मशीन से होगा रेडिएशन उपचार
बैठक में कैंसर के रेडिएशन उपचार के लिए आधुनिक LINAC मशीन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार, रेडिएशन सेंटर के संचालन के लिए केवल मशीन उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए रेडिएशन विशेषज्ञ, टेक्नीशियन और रेडियो फिजिसिस्ट जैसे प्रशिक्षित कर्मचारियों की भी जरूरत होगी।
झारखंड में रेडियो फिजिसिस्ट की कमी को इस योजना की बड़ी चुनौती माना जा रहा है। ऐसे में सेंटर शुरू करने के साथ ही प्रशिक्षित तकनीकी मानवबल की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मशीन खराब होने पर वैकल्पिक व्यवस्था पर भी जोर
बैठक में रेडिएशन मशीन के खराब होने की स्थिति में मरीजों का इलाज प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था और मशीनों के रखरखाव पर भी चर्चा हुई।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया कि डे-केयर सेंटर और रेडिएशन सेंटर की व्यवस्था अलग-अलग होगी। डे-केयर सेंटर में चिकित्सा पदाधिकारी के माध्यम से सेवाएं संचालित की जाएंगी, जबकि रेडिएशन सेंटर के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी।
जमशेदपुर समेत छह जगहों पर मिलेगी सुविधा
इस योजना के लागू होने के बाद कैंसर मरीजों को रेडिएशन और कीमोथेरेपी के लिए दूसरे राज्यों या दूर के बड़े शहरों पर निर्भरता कम हो सकती है। खासकर जमशेदपुर, धनबाद, पलामू, हजारीबाग और दुमका जैसे क्षेत्रों के मरीजों को अपने आसपास इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद है।










