सोशल संवाद / डेस्क : हिन्दी पखवाड़ा-2026: सोना देवी विश्वविद्यालय परिवार की ओर से हिन्दी पखवाड़ा-2026 के आयोजन के दौरान हिन्दी के व्यवहारिक प्रयोग, शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक से इसके जुड़ाव पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. नीत नयना, कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा और कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने हिन्दी को दैनिक जीवन और कार्यों में अधिक से अधिक प्रयोग करने का आह्वान किया।
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हिन्दी के व्यवहारिक प्रयोग पर कुलसचिव ने दिया जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने कहा कि हिन्दी का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब इसे व्यवहार और दैनिक कार्यों का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि हिन्दी के प्रति सम्मान केवल हिन्दी दिवस या हिन्दी पखवाड़े तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे वर्ष हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से शिक्षण, संवाद, कार्यालयीन कार्य और विभिन्न गतिविधियों में हिन्दी के अधिकाधिक व्यवहारिक प्रयोग को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में अपनी भाषा के प्रति गौरव की भावना विकसित करना शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हिन्दी को व्यवहार की भाषा बनाने का आह्वान
कुलपति प्रो. डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने हिन्दी को व्यवहार में अधिक से अधिक उपयोग करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिन्दी को समृद्ध बनाने का प्रभावी तरीका यही है कि हम स्वयं हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करें और आने वाली पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार होती है। हिन्दी के विकास के साथ भारतीय साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना का भी विस्तार होता है। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से शिक्षा, अनुसंधान, संवाद तथा रचनात्मक गतिविधियों में हिन्दी के अधिक प्रयोग का आह्वान किया।
कुलपति ने कहा कि आज का युवा तकनीक और डिजिटल माध्यमों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में हिन्दी को डिजिटल तकनीक, इंटरनेट, सोशल मीडिया और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ना समय की आवश्यकता है। हिन्दी को तकनीकी और आधुनिक ज्ञान के क्षेत्र में प्रभावशाली भाषा बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
हिन्दी को वैश्विक भाषा बनाने पर जोर
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने विद्यार्थियों को हिन्दी के प्रति प्रेरित करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत “हिन्दी है वतन है, हिन्दुस्तान हमारा” जैसे भावपूर्ण संदेश से की। उन्होंने कहा कि हिन्दी भारत की विविधताओं के बीच संवाद और संपर्क का एक सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि भारत की विशाल भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता के बावजूद हिन्दी देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हिन्दी ने अलग-अलग भाषायी समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने में भी योगदान दिया है।
कुलाधिपति ने कहा कि राष्ट्रहित, राष्ट्र की एकता और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के संदर्भ में भाषा का महत्व और बढ़ जाता है। हिन्दी भारतीय जनमानस की भावनाओं, विचारों और आकांक्षाओं को व्यापक स्तर पर अभिव्यक्त करने वाली महत्वपूर्ण भाषा है।
उन्होंने विद्यार्थियों से हिन्दी के साथ-साथ अन्य भारतीय और विदेशी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि बहुभाषिकता व्यक्ति के ज्ञान, संवाद क्षमता और दृष्टिकोण को व्यापक बनाती है।
अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का किया उल्लेख
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे वैश्विक मंच पर हिन्दी में संबोधन देकर हिन्दी की क्षमता और प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी।
उन्होंने कहा कि हिन्दी को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने के लिए साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका निभानी होगी। हिन्दी का वैश्विक विस्तार केवल भाषा का विस्तार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य, विचार और ज्ञान परंपरा के विस्तार से भी जुड़ा है।
‘विकास, समृद्धि और विश्वगुरु भारत’ की अवधारणा पर जोर
कुलाधिपति ने विकास, समृद्धि, उन्नति और ‘विश्वगुरु भारत’ की अवधारणा पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत के विकास में भाषा और संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान, कौशल, व्यक्तित्व और भाषा क्षमता को लगातार विकसित करने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए अपनी भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करना होगा। हिन्दी इस व्यापक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना को अभिव्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
हिन्दी पखवाड़े में होंगे कई कार्यक्रम
हिन्दी पखवाड़ा-2026 के तहत आगामी दिनों में विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय परिवार की सहभागिता से कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें निबंध लेखन, भाषण, कविता पाठ, वाद-विवाद, सुलेख, प्रश्नोत्तरी, साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं।
इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों की हिन्दी भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ उनकी रचनात्मकता और अभिव्यक्ति क्षमता का विकास करना है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार हिन्दी पखवाड़ा केवल औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि हिन्दी को दैनिक व्यवहार, शिक्षा, अनुसंधान, प्रशासन और सांस्कृतिक जीवन से जोड़ने का प्रयास है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार की रही सहभागिता
कार्यक्रम के अंत में डॉ. कंचन सिन्हा ने अतिथियों, विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने हिन्दी पखवाड़ा-2026 को सफल बनाने में सभी के सहयोग की सराहना की और आगामी कार्यक्रमों में भी अधिकाधिक सहभागिता की अपील की।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान, गौरव और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ हुआ।
सोना देवी विश्वविद्यालय परिवार ने हिन्दी पखवाड़ा-2026 के माध्यम से हिन्दी को व्यवहार, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से जोड़ते हुए इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक सशक्त एवं प्रतिष्ठित बनाने का संकल्प व्यक्त किया।










