तुरामडीह माइंस में ठेका कार्यों और सामग्री के इस्तेमाल पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

By Riya Kumari

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तुरामडीह माइंस में ठेका कार्यों और सामग्री के इस्तेमाल पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

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सोशल संवाद / जादूगोड़ा/तुरामडीह: यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) की तुरामडीह माइंस में ठेका कार्यों, कंपनी की सामग्री के कथित इस्तेमाल और भूमिगत व सतही कार्यों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतों में कार्यादेश के अनुपालन, सामग्री के इस्तेमाल, माप पुस्तिका और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

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इन मुद्दों को वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश सिंह की ओर से लगातार उठाया जा रहा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यदि कहीं अनियमितता हुई है तो रिकॉर्ड और स्थल सत्यापन के आधार पर सच्चाई सामने लाना है।

₹1.39 करोड़ के Work Order को लेकर उठे सवाल

शिकायत में करीब ₹1.39 करोड़ के Work Order का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, 24 नवंबर 2025 को जारी Work Order No. GEMC-511687761339113 में “Deployment of manpower for miscellaneous civil work in underground at Turamdih Mines” का उल्लेख है। इसकी कुल राशि ₹1,39,70,190.19 बताई गई है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निर्धारित भूमिगत कार्यों के बजाय सड़क, ग्रेडिंग, बैरिकेडिंग या अन्य सतही कार्य कराए गए। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में यह जांच करने की मांग की गई है कि कार्यादेश की शर्तों में कोई बदलाव हुआ था या नहीं, यदि हुआ तो किस स्तर से अनुमति दी गई और Measurement Book व भुगतान अभिलेखों में कार्य को किस रूप में दर्ज किया गया।

Rock Bolt के इस्तेमाल को लेकर भी शिकायत

शिकायत में भूमिगत खदान में चट्टान और छत की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली Rock Bolt सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ऐसी सामग्री का इस्तेमाल सड़क या अन्य सतही निर्माण कार्यों में किया गया।

यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है, तो इसका असर केवल कंपनी की सामग्री के उपयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह खान सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण विषय हो सकता है।

इसी वजह से शिकायतकर्ताओं ने Material Issue Register, Stock Register, Store Requisition, Site Records और Measurement Book का आपस में मिलान कराने की मांग की है। साथ ही यह पता लगाने की मांग की गई है कि Rock Bolt किस उद्देश्य से और कितनी मात्रा में जारी की गई तथा उसका वास्तविक उपयोग कहां हुआ।

पिछले तीन वर्षों के कार्यों के विशेष ऑडिट की मांग

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पिछले करीब तीन वर्षों में समान प्रकृति के कार्यों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इनमें सड़क निर्माण, ग्रेडिंग, बैरिकेडिंग, शेड और अन्य सिविल कार्य शामिल हैं।

इसी आधार पर जांच को किसी एक Work Order तक सीमित नहीं रखने और पिछले कम से कम तीन वर्षों के संबंधित कार्यादेशों का विशेष ऑडिट कराने की मांग की गई है।

जांच के दौरान इन रिकॉर्ड का मिलान करने की मांग की गई है:

  • Work Order और BOQ
  • Measurement Book
  • RA Bill और Final Bill
  • Stock एवं Material Issue Register
  • Store Requisition
  • Gate Pass
  • Muster Roll
  • Site Instructions
  • Contractor Payment Records

ठेका प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं ने ठेका व्यवस्था में कथित पक्षपात के आरोपों की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि समान प्रकृति के कार्यों में बार-बार किन ठेकेदारों को काम मिला, निविदा प्रक्रिया में कितने संवेदकों ने हिस्सा लिया और कार्य आवंटन व भुगतान की प्रक्रिया क्या रही, इसकी रिकॉर्ड के आधार पर समीक्षा होनी चाहिए।

इसके अलावा, यदि किसी ठेका कार्य में UCIL की सामग्री का इस्तेमाल हुआ है तो यह भी जांच का विषय बताया गया है कि उस सामग्री की लागत ठेकेदार के भुगतान में शामिल थी या नहीं।

खान प्रबंधन की भूमिका की जांच की मांग

शिकायत में तुरामडीह खान प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। विशेष रूप से खान प्रबंधक मनोज कुमार मिश्रा की भूमिका को लेकर आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि, इन आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। इसलिए शिकायतकर्ताओं ने कार्यादेश, निरीक्षण, माप, सामग्री निर्गमन और भुगतान अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।

Posting और Transfer History की समीक्षा की मांग

शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों की लंबे समय से तुरामडीह इकाई में पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की Posting और Transfer History की समीक्षा की मांग की है।

जांच में यह देखा जा सकता है कि संबंधित अवधि में स्थानांतरण से जुड़े कोई आदेश जारी हुए थे या नहीं और यदि कोई आदेश हुआ तो उसमें बाद में कोई संशोधन किया गया या नहीं।

कथित ‘सिंडिकेट’ के आरोपों की भी जांच की मांग

शिकायत में कुछ ठेकेदारों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों के बीच कथित सांठगांठ या ‘सिंडिकेट’ के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने इन आरोपों को निष्कर्ष के रूप में पेश करने के बजाय स्वतंत्र जांच की मांग की है।

इसके लिए ठेका आवंटन, कर्मचारी एवं सुपरवाइजर की तैनाती, Measurement Book में हस्ताक्षर, सामग्री निर्गमन, बिल सत्यापन और भुगतान अनुमोदन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

मामला वित्तीय पारदर्शिता के साथ खान सुरक्षा से भी जुड़ा

तुरामडीह एक भूमिगत यूरेनियम खदान है। ऐसे में भूमिगत सुरक्षा से संबंधित सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत का परीक्षण केवल वित्तीय दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि तकनीकी और सुरक्षा मानकों के आधार पर भी किए जाने की मांग की गई है।

विशेष रूप से Rock Bolt जैसी सामग्री के इस्तेमाल को लेकर शिकायत सही पाए जाने की स्थिति में इसके खान सुरक्षा पर संभावित प्रभाव का तकनीकी परीक्षण जरूरी होगा।

UCIL Vigilance/Corporate स्तर से जांच की मांग

वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश सिंह ने मांग की है कि मामले की जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रहे। उन्होंने UCIL Vigilance/Corporate स्तर की स्वतंत्र जांच टीम से मामले की जांच कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की संपत्ति की सुरक्षा, ठेका प्रक्रिया में पारदर्शिता और खदान में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा व्यापक जनहित से जुड़े विषय हैं।

जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट करने की मांग

सतीश सिंह और शिकायतकर्ताओं की ओर से मुख्य रूप से इन बिंदुओं की जांच की मांग की गई है:

  1. पिछले तीन वर्षों के संबंधित Work Orders का विशेष ऑडिट।
  2. भूमिगत और सतही कार्यों का भौतिक सत्यापन।
  3. Rock Bolt समेत कंपनी की सामग्री के निर्गमन और वास्तविक इस्तेमाल का मिलान।
  4. Work Order, BOQ, Measurement Book और Bills की जांच।
  5. ठेका आवंटन प्रक्रिया और बार-बार काम पाने वाले ठेकेदारों की समीक्षा।
  6. संबंधित अधिकारियों की Posting/Transfer History की जांच।
  7. बिल तैयार करने से लेकर भुगतान स्वीकृति तक की प्रक्रिया की समीक्षा।
  8. खान सुरक्षा से जुड़े आरोपों की तकनीकी जांच।
  9. UCIL Vigilance/Corporate स्तर से स्वतंत्र जांच।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप गलत हैं तो जांच और संबंधित रिकॉर्ड से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं, यदि किसी आरोप में तथ्य पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना है कि पारदर्शी जांच से UCIL की संपत्ति, ठेका व्यवस्था और तुरामडीह माइंस में कार्यरत श्रमिकों के हितों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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