सोशल संवाद / डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर ‘राष्ट्र-विरोधी’ नारे, भाषण और मीम्स से जुड़े कंटेंट को पहचानने, हटाने और ब्लॉक करने की मांग वाली PIL पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दूसरे कानूनी विकल्पों पर विचार करने को कहा।
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यह मामला अहमदाबाद निवासी हितेंद्र कुमार परसोत्तमभाई गाधिया की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। याचिका में केंद्र सरकार के साथ X Corp, Facebook, YouTube, Instagram और WhatsApp जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पक्षकार बनाया गया था।
सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की मांग
याचिका में आरोप लगाया गया था कि सोशल मीडिया और SMS के जरिए कथित फेक न्यूज, भड़काऊ बयान, नारे और मीम्स फैलाए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि ऐसे कंटेंट से सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था और न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
याचिका में अदालत से ‘रिट ऑफ मैंडमस’ जारी करने और संबंधित प्लेटफॉर्म पर मौजूद ऐसे पोस्ट को हटाने या ब्लॉक करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट की 23 सितंबर की सूची में भी यही पीठ दर्ज है। सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता को अन्य उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करने को कहा। कोर्ट ने इस PIL को सोशल मीडिया कंटेंट से जुड़े किसी अन्य लंबित मामले के साथ जोड़ने से भी इनकार कर दिया।
याचिका में क्या आरोप लगाए गए?
याचिका में कहा गया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कथित फेक मैसेज और भड़काऊ कंटेंट से सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव को खतरा पैदा हो सकता है। याचिकाकर्ता ने ऐसे कंटेंट पर कार्रवाई के लिए केंद्र और सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश देने की मांग की थी।
हालांकि, कोर्ट ने इस PIL को सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया और याचिकाकर्ता को वैकल्पिक कानूनी रास्ते अपनाने का सुझाव दिया।












