सोशल संवाद / डेस्क : भारत के वीडियो और एंटरटेनमेंट बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Media Partners Asia (MPA) की Asia Video Content Dynamics 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पहली बार ऑनलाइन वीडियो और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर होने वाला कंटेंट निवेश टेलीविजन से आगे निकल गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत के कुल वीडियो कंटेंट निवेश में ऑनलाइन वीडियो की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत, जबकि टेलीविजन की हिस्सेदारी करीब 42 प्रतिशत रही। यह बदलाव भारत में कंटेंट इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
भारत में करीब 5 अरब डॉलर का कंटेंट निवेश
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2025 के दौरान वीडियो कंटेंट पर करीब 5 अरब डॉलर का निवेश हुआ। इस मामले में भारत एशिया के सात प्रमुख बाजारों में दक्षिण कोरिया के बाद दूसरे स्थान पर रहा।
दक्षिण कोरिया में करीब 6.9 अरब डॉलर का कंटेंट निवेश हुआ। भारत और दक्षिण कोरिया ने मिलकर भारत, कोरिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड और वियतनाम में हुए कुल कंटेंट निवेश का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया।
MPA के अनुमान के अनुसार, इन सात बाजारों में कुल कंटेंट निवेश 2026 में करीब 15.1 अरब डॉलर और 2031 तक लगभग 15.4 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
भारतीयों ने 2025 में 420 अरब घंटे देखा ऑनलाइन वीडियो
कंटेंट निवेश में बदलाव के साथ दर्शकों की ऑनलाइन वीडियो देखने की आदत भी तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दर्शकों ने 2025 में अनुमानित 420 अरब घंटे ऑनलाइन वीडियो देखा। इससे देश में OTT और डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म की बढ़ती पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।
भारत के प्रीमियम वीडियो-ऑन-डिमांड बाजार में JioHotstar की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत बताई गई है। रिपोर्ट में प्लेटफॉर्म के 18 करोड़ से अधिक भुगतान करने वाले ग्राहकों का भी उल्लेख किया गया है।
खेल और क्रिकेट से OTT प्लेटफॉर्म को फायदा
भारत में OTT प्लेटफॉर्म की बढ़ती लोकप्रियता में खेलों की भी बड़ी भूमिका सामने आई है। खास तौर पर क्रिकेट डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म के लिए महत्वपूर्ण कंटेंट बन चुका है। MPA की रिपोर्ट के अनुसार, IPL 2026 के दौरान JioHotstar की कनेक्टेड टीवी पहुंच में 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, रिपोर्ट के सार्वजनिक सारांश में इस वृद्धि के तुलनात्मक आधार का उल्लेख नहीं किया गया है।
एशिया के दूसरे बाजारों में भी खेल स्ट्रीमिंग के लिए प्रमुख कंटेंट बना हुआ है। दक्षिण कोरिया में बेसबॉल और अन्य प्रीमियम स्पोर्ट्स राइट्स का असर OTT सब्सक्रिप्शन पर दिखाई दिया। वहीं इंडोनेशिया में फुटबॉल और UEFA प्रतियोगिताओं को स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म अपनी रणनीति का हिस्सा बना रहे हैं।
स्थानीय फिल्मों का भी बढ़ रहा प्रभाव
OTT के साथ-साथ स्थानीय सिनेमा भी एशिया के वीडियो बाजार में निवेश आकर्षित कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2025 में करीब 1.41 अरब डॉलर का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दर्ज किया। स्थानीय फिल्मों की मजबूत पकड़ कई एशियाई बाजारों में देखने को मिली।
वियतनाम में 2025 के दौरान बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 20 प्रतिशत बढ़कर करीब 213 मिलियन डॉलर पहुंचा और स्थानीय फिल्मों की हिस्सेदारी 69 प्रतिशत रही। इंडोनेशिया में बॉक्स ऑफिस 10.5 प्रतिशत बढ़कर करीब 325 मिलियन डॉलर रहा, जिसमें स्थानीय फिल्मों की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत बताई गई।
टीवी की पहुंच बरकरार, लेकिन विज्ञापन बाजार पर दबाव
रिपोर्ट यह संकेत नहीं देती कि टेलीविजन की मांग खत्म हो रही है। एशिया के सातों बाजारों में कंटेंट निवेश का बड़ा हिस्सा अभी भी टीवी को मिल रहा है। हालांकि, टेलीविजन के लिए चुनौती मुद्रीकरण और विज्ञापन राजस्व की है। कुछ बाजारों में टीवी विज्ञापन खर्च में गिरावट दर्ज की गई है।
थाईलैंड में टीवी विज्ञापन खर्च 2025 में 18 प्रतिशत घटकर करीब 422 मिलियन डॉलर रह गया। MPA के मुताबिक, कई टीवी बाजारों में विज्ञापन क्षमता और उपलब्ध इन्वेंट्री के बीच असंतुलन भी देखने को मिल रहा है।
कंटेंट प्रोडक्शन में बढ़ रही चयनात्मकता
OTT और टेलीविजन दोनों ही प्लेटफॉर्म अब कंटेंट प्रोडक्शन को लेकर पहले की तुलना में अधिक चयनात्मक होते जा रहे हैं। इसका असर प्रोडक्शन कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर भी पड़ रहा है। MPA के अनुसार, उन स्टूडियो और प्रोडक्शन कंपनियों को ज्यादा महत्व मिल रहा है जिनके पास लगातार काम, मजबूत बौद्धिक संपदा (IP) या आय के कई स्रोत मौजूद हैं।
दक्षिण कोरिया में ड्रामा प्रोडक्शन की लागत एशिया में सबसे अधिक होने के बावजूद प्रोडक्शन का मुनाफा करीब 5 से 10 प्रतिशत तक सीमित रहने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
भारत में मीडिया सेक्टर में बढ़ सकता है विलय और अधिग्रहण
वीडियो इंडस्ट्री में कंपनियां अब दर्शकों की संख्या के साथ-साथ टिकाऊ मुनाफे पर भी ध्यान दे रही हैं। इसके चलते पुनर्गठन, साझेदारी, विलय और अधिग्रहण जैसी गतिविधियों का महत्व बढ़ सकता है।
MPA ने भारत और दक्षिण कोरिया को इस बदलाव में आगे रहने वाले बाजारों में शामिल किया है। भारत में वीडियो सेक्टर को प्रभावित करने वाला एक बड़ा सौदा पहले ही हो चुका है, जबकि आगे भी मीडिया कंपनियों के बीच M&A गतिविधियां बढ़ने की संभावना रिपोर्ट में जताई गई है।
AI और नई टेक्नोलॉजी पर बढ़ेगा फोकस
वीडियो इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों की कमी नहीं, बल्कि लाभप्रदता बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, एशिया की मीडिया कंपनियों के पास बड़े दर्शक वर्ग, मजबूत ब्रांड और पर्याप्त क्रिएटिव क्षमता मौजूद है, लेकिन इन्हें लगातार मुनाफे में बदलना चुनौती बना हुआ है।
आने वाले वर्षों में AI, लागत में कमी, बेहतर पूंजी प्रबंधन, सहयोग और खास तरह के कंटेंट पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है।
कुल मिलाकर, भारत का वीडियो बाजार तेजी से बदल रहा है। OTT और स्ट्रीमिंग में बढ़ता निवेश, खेलों की डिजिटल लोकप्रियता और स्थानीय फिल्मों की मजबूत मांग यह संकेत देती है कि आने वाले समय में भारत के कंटेंट बिजनेस में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।











