सोशल संवाद / डेस्क : राज्य में दो करोड़ परिवारों के लिए उद्यम और रोजगार का रोडमैप तैयार किया गया है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में एक करोड़ परिवार को उद्यमी बनाया जाएगा। साथ ही एक करोड़ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। पठक के बाद कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने बिहार एमएसएमई नीति, 2026 को घटनोत्तर स्वीकृति दी है।
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इस नीति के तहत पांच वर्षों में एक करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने और एक करोड़ प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य है। इसके अलावा राज्य में साख-जमा अनुपात 75 प्रतिशत तक पहुंचाने, सभी 38 जिलों में एमएसएमई केंद्र खोलने और प्रत्येक जिले में एक औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की योजना है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि इस नीति के तहत उद्यमियों को वित्त, बाजार, तकनीक और कौशल विकास में सहायता मिलेगी। वहीं, बिहार मार्ट और एमएसएमई मंडपम के माध्यम से बाजार तक पहुंच आसान होगा। बैठक में कुल 44 प्रस्तावों को हरी झंडी दी गयी।
टाउनशिप क्षेत्र में जमीन खरीद-बिक्री से रोक हटी
ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप प्रक्षेत्र के लोगों को सरकार ने बड़ी राहत देते हुए यहां जमीन की खरीद-बिक्री की अनुमति फिर से प्रदान कर दी है। सके तहत टाउनशिप के लिए चयनित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर लगी रोक तत्काल प्रभाव से हटाई गई। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, टाउनशिप की विकास योजना अधिसूचित होने के बाद भवन निर्माण और भूमि विकास निर्धारित भूमि उपयोग तथा लागू विकास नियंत्रण नियमों (डीसीआर) के अनुसार ही किया जा सकेगा। यानी, इस फैसले से चयनित क्षेत्रों में जमीन के लेन-देन पर लगी पाबंदी हटेगी। लेकिन, निर्माण और विकास के लिए अधिसूचित योजना के प्रावधानों का पालन करना होगा। गौर हो कि राज्य में 12 ग्रीनफील्ड सेटेलाइट टाउनशिप विकसित की जा रही है।
कोसी-गंडक, सोन के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे होगा
बाढ़ की विभीषिका से परेशान राज्य सरकार गंगा की प्रमुख सहायक नदियों के बाढ़ प्रवण क्षेत्रों को निर्धारित करने के लिए सर्वे कराएगी। अपर मुख्य सचिव चौधरी ने बताया कि 12 केबिनेट के निर्णय के अनुसार कोसी, गंडक और सोन नद के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए लगभग दो करोड़ रुपये खर्च होंगे। योजना के तहत राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की को अध्ययन की जिम्मेवारी सौंपी जाएगी। संस्थान तीनों नदियों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन कर उसे निर्धारित करेगा। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के योजनाबद्ध विकास में मदद मिलेगी। इन क्षेत्रों का पर्यावरणीय एवं सामाजिक आर्थिक परिदृश्यों के अनुसार सतत एवं संतुलित विकास होगा।










