सोशल संवाद / डेस्क : अमेरिका में मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी में अंदरूनी असंतोष सामने आने लगा है। चुनावी हार के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने ईरान युद्ध, टैरिफ नीति और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति ट्रम्प के रुख को हार की प्रमुख वजह बताया है। वहीं, ट्रम्प के करीबी नेताओं ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर आरोप लगाया है कि उन्होंने राष्ट्रपति को ईरान युद्ध में उलझा दिया, लेकिन युद्ध से बाहर निकलने की कोई स्पष्ट रणनीति नहीं बनाई।
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दैनिक अवंतिका की रिपोर्ट के मुताबिक, टेक्सास के रिपब्लिकन नेता चैड विलबैंक्स ने भी ट्रम्प के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि ईरान युद्ध, टैरिफ और रूस को लेकर अपनाई गई नीतियों ने पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित किया है।
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पर उठे सवाल
मिडटर्म चुनाव में हार के बाद रिपब्लिकन खेमे में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। CNN के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रम्प के करीबी नेताओं ने आरोप लगाया कि हेगसेथ ने राष्ट्रपति को ईरान युद्ध में उलझा दिया, लेकिन इससे निकलने की स्पष्ट योजना नहीं बनाई।
इस घटनाक्रम ने ट्रम्प प्रशासन की विदेश नीति और सैन्य रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद उजागर कर दिए हैं।
जेडी वेंस ने भी मानी समर्थकों की नाराजगी
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी स्वीकार किया कि ईरान युद्ध के कारण ट्रम्प के कई पुराने समर्थकों ने इस बार रिपब्लिकन पार्टी से दूरी बना ली। उन्होंने चुनावी हार के पीछे ईरान युद्ध को एक प्रमुख कारण बताया। इससे पार्टी के भीतर विदेश नीति को लेकर मतभेद और स्पष्ट हो गए हैं।
डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में बढ़त
मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई, पेट्रोल की कीमतों और जीवनयापन की लागत को लेकर मतदाताओं में नाराजगी चुनाव में बड़ा मुद्दा बनी।
अब ट्रम्प के सामने पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती
चुनावी नतीजों के बाद ट्रम्प प्रशासन की नीतियों पर पार्टी के भीतर सवाल उठने लगे हैं। खासकर ईरान युद्ध और रक्षा मंत्रालय की भूमिका को लेकर असंतोष सामने आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में रिपब्लिकन पार्टी के भीतर नेतृत्व और नीतियों को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।











