सोशल संवाद / चक्रधरपुर: पद्मावती जैन (पीजे) सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, पंप रोड चक्रधरपुर में शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मातृ सम्मेलन सह दीपावली उत्सव का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस अवसर पर माताओं के लिए रंगोली, चूड़ी पहनाओ, बिंदी लगाओ और म्यूजिकल चेयर जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं, विद्यालय के भैया-बहनों ने आर्ट एंड क्राफ्ट, दीप सजाओ और दीपावली घर निर्माण के जरिए अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एम. रवानी, वार्ड पार्षद मंजू मिंज, विद्यालय की उपाध्यक्ष दमयंती नाग और प्रधानाचार्य आनंद चंद्र प्रधान ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन कर किया। इसके बाद प्रधानाचार्य ने अतिथियों का परिचय कराया और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। विद्यालय की शिक्षिका शांति देवी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत की।
कार्यक्रम में विद्यालय की छात्राओं ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों और माताओं का अभिनंदन किया। कक्षा चतुर्थ एवं पंचम की छात्राओं ने तीन गीतों पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। विद्यालय परिसर में बच्चों द्वारा बनाए गए आकर्षक दीपावली घर, दीप और दीपावली से संबंधित चित्र भी प्रदर्शित किए गए।
प्रतियोगिताओं में इन प्रतिभागियों ने हासिल किए स्थान
माताओं की प्रतियोगिताएं:
- रंगोली प्रतियोगिता: प्रथम – अश्विनी मुखी, द्वितीय – प्रिया माझी, तृतीय – बॉबी महतो।
- चूड़ी पहनाओ प्रतियोगिता: प्रथम – ज्योत्सना दास एवं सोनी महतो, द्वितीय – सुमित्रा मुखी एवं विरंती बोदरा, तृतीय – नीलम महतो एवं बॉबी महतो।
- बिंदी प्रतियोगिता: प्रथम – दीपा मोदक, द्वितीय – राजमुनी चाकी, तृतीय – लक्ष्मी जी।
- म्यूजिकल चेयर: प्रथम – लक्ष्मी जी, द्वितीय – सुमित्रा मुखी।
विद्यार्थियों की प्रतियोगिताएं:
- दीपावली घर निर्माण: प्रथम – माधुरी समाड़, द्वितीय – सिद्धांत मुखी, तृतीय – अमृता पूर्ति।
- दीया सजाओ प्रतियोगिता: प्रथम – रानी जामुदा, द्वितीय – मनकृत मुखी, तृतीय – मयंक महतो।
- आर्ट एंड क्राफ्ट: प्रथम – मयूर महतो, द्वितीय – दृष्टि महतो, तृतीय – सभ्या मुखी।
बच्चों की पहली शिक्षक होती है मां: एम. रवानी
मुख्य अतिथि एम. रवानी ने अपने संबोधन में कहा कि मां बच्चों की पहली शिक्षक होती है। उन्होंने मातृत्व को ईश्वर का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि आधुनिकता को अपनाने के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को नहीं भूलना चाहिए। बच्चों को बड़ों का चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। उन्होंने परिवार में माता-पिता और बुजुर्गों के सम्मान तथा संस्कारों को महत्व देने की अपील की।
वहीं, वार्ड संख्या 22 की पार्षद मंजू मिंज ने कहा कि आजकल महिलाएं घर के साथ-साथ बाहर की जिम्मेदारियां भी निभाती हैं। ऐसे में कई बार बच्चों को पर्याप्त समय देना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि एक मां होने के नाते सभी को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए बच्चों के पालन-पोषण और संस्कारों पर विशेष ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए।
विद्यालय की उपाध्यक्ष दमयंती नाग ने दीपावली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भगवान श्रीराम की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम ने अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की थी। उनके अयोध्या लौटने की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा को दीपावली के रूप में मनाया जाता है।
इसके बाद माताओं के बीच विभिन्न मनोरंजक खेल और प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विजेताओं को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम के अंत में सौभीक घटक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच मिठाइयां भी वितरित की गईं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, माताएं और अभिभावक उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में प्रधानाचार्य आनंद चंद्र प्रधान, शांति देवी, स्वास्तिक सोए, सुलेखा टुडू, शिवसागर दास, सुधा लकड़ा, चांदनी जोंकों, जयंती तांती और सौभीक घटक का महत्वपूर्ण योगदान रहा।











