सोशल संवाद /डेस्क : महाराष्ट्र के बाद अब कर्नाटक सरकार ने भी स्कूली बच्चों में बढ़ती जंक फूड की आदतों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी (II PUC) कॉलेजों के परिसर के भीतर तथा उनके 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट (HFSS) यानी जंक फूड की बिक्री, मुफ्त वितरण, विज्ञापन और प्रचार पर रोक लगा दी है।
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क्या है सरकार का आदेश?
सरकार के निर्देश के अनुसार स्कूल और कॉलेज परिसरों के अंदर तथा 50 मीटर की सीमा में चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड स्नैक्स और अन्य HFSS श्रेणी के खाद्य पदार्थों की बिक्री या प्रचार नहीं किया जा सकेगा। इस आदेश का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन के लिए प्रोत्साहित करना और मोटापा व अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाना है।
स्कूल प्रबंधन की होगी जिम्मेदारी
सरकार ने इस आदेश के पालन की जिम्मेदारी संबंधित स्कूल और कॉलेज प्रबंधन को सौंपी है। हालांकि, कई शिक्षण संस्थानों ने यह सवाल उठाया है कि “जंक फूड” की स्पष्ट परिभाषा क्या होगी और किन-किन खाद्य पदार्थों को इस श्रेणी में रखा जाएगा।
महाराष्ट्र ने भी उठाया था ऐसा कदम
इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने भी स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री, वितरण और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया था। राज्य का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को अस्वस्थ खानपान से दूर रखना और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।
क्यों लिया गया फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में मोटापा, मधुमेह और अन्य गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्कूलों के आसपास जंक फूड की उपलब्धता कम करना एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य कदम है।









