सोशल संवाद/जमशेदपुर : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में हाल के दिनों में चले ऑपरेशनों में बड़ी सफलता मिलने से सुरक्षाबलों के हौसले बुलंद हैं. क्षेत्र को नक्सलमुक्त करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है. मंगलवार को चाईबासा में सदर प्रखंड कार्यालय के समीप सीआरपीएफ कार्यालय में सीआरपीएफ और एसटीएफ के आइजी ने हाई लेवल मीटिंग की. यहां सीआरपीएफ के आइजी साकेत कुमार ने कहा कि पिछले कुछ समय में हुई मुठभेड़ों में दर्जन भर से ज्यादा नक्सलियों को ढेर किया गया है. जो नक्सली बच गये हैं, उन्हें भी जल्द ढूंढ निकाला जायेगा. 31 मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने के लक्ष्य को पूरा करना है. ऐसे में नक्सलियों के खिलाफ नयी रणनीति के तहत अभियान चलाने पर चर्चा हुई. उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलियों के खिलाफ चल रही लड़ाई में अभी काफी काम किया जाना शेष है.

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इधर, सारंडा के तिरिलपोसी में आइइडी ब्लास्ट में दो लोग गंभीर
मनोहरपुर प्रखंड के जराइकेला थाना के तिरिलपोसी में आइइडी विस्फोट से इसी गांव के दो ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गये. तिरिलपोसी गांव सारंडा जंगल के पास स्थित है. घायलों में जयसिंह चेरोवा (35) और सलाई चेरोवा (31) शामिल हैं. रात होने के कारण दोनों घायलों को जंगल से बाहर नहीं निकाला जा सका है. पुलिस दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाने के प्रयास में जुटी है. घटना की पुष्टि एसपी अमित रेणु ने की है. जानकारी के मुताबिक तिरिलपोसी के 10-12 ग्रामीण मंगलवार को पास के जंगल गये थे. लौटने के क्रम में
रात होने के कारण दोनों घायलों को जंगल से नहीं निकाला जा सका
नक्सलियों द्वारा बिछाये गये आइइडी की चपेट में आ गये. विस्फोट होने से दोनों उसकी जद में आकर गंभीर रूप से घायल हो गये. सूचना मिलने पर जराइकेला पुलिस और सीआरपीएफ के जवान मौके की ओर रवाना हो गये हैं. पर रात होने और जंगल में बिछे आइइडी की आशंका के कारण राहत कार्य में परेशानी हो रही है. मनोहरपुर सीएचसी को अलर्ट मोड में रखा गया है.
मिसिर बेसरा की तलाश तेज, आइइडी पर भी चर्चा
विदित हो कि हालिया मुठभेड़ में कई इनामी नक्सली मारे गये थे. नक्सलियों का शीर्ष नेता मिसिर बेसरा अपनी टीम के साथ भाग निकलने में सफल रहा था. सुरक्षाबलों ने उसे लगभग घेर लिया था, लेकिन वह चकमा देकर निकल गया. वर्तमान में सुरक्षाबलों ने घेराबंदी की कार्रवाई को अब भी जारी रखा है. हालांकि, सुरक्षाबलों की सक्रियता के बाद सारंडा के जंगलों में फिलहाल खामोशी छायी है, लेकिन नक्सलियों द्वारा बिछाये गये आइइडी की वजह से ग्रामीणों में अब भी दहशत का माहौल है.









