सोशल संवाद / डेस्क: अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों के लिए एक बड़ा बदलाव हो सकता है। सरकार अग्निवीरों को सेवा अवधि के दौरान शादी करने की अनुमति देने पर विचार कर रही है। फिलहाल लागू नियमों के मुताबिक, अग्निवीर अपने चार साल के कार्यकाल में शादी नहीं कर सकते। हालांकि, इस प्रस्ताव पर चर्चा के बीच ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीरों के परिवार को पेंशन देने की मांग पर फिलहाल कोई बदलाव होने की उम्मीद नहीं है।
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सेवा अवधि बढ़ने के बाद शादी के नियम पर विचार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच अग्निवीरों की शादी से जुड़े मौजूदा नियमों में बदलाव को लेकर चर्चा हुई है। दरअसल, सरकार की ओर से अग्निवीरों की सेवा अवधि में दो साल का विस्तार देने की घोषणा के बाद इस नियम पर दोबारा विचार किया जा रहा है।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने 4 नवंबर को घोषणा की थी कि पहले बैच के अग्निवीरों को दो साल का सेवा विस्तार दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें नियमित सैनिकों के तौर पर सेना में शामिल करने की योजना बताई गई है।
6 साल तक शादी पर रोक से हो रही सामाजिक परेशानी
रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य अधिकारियों का मानना है कि अग्निवीरों की सेवा अवधि बढ़ने के बाद शादी पर लगी रोक की समीक्षा जरूरी हो गई है। अग्निवीरों की भर्ती आमतौर पर 17 से 21 साल की उम्र के बीच होती है। ऐसे में अगर उन्हें छह साल तक शादी करने की अनुमति नहीं मिलती है, तो उन्हें सामाजिक और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कम उम्र में शादी की परंपरा को देखते हुए सही जीवनसाथी चुनने में भी मुश्किल हो सकती है। हालांकि, शादी की अनुमति देने को लेकर अभी कोई अंतिम आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
सेवा विस्तार के दौरान मिल सकती हैं अतिरिक्त सुविधाएं
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अतिरिक्त 24 महीने की सेवा के दौरान अग्निवीरों को उनकी संबंधित यूनिट में ‘अग्निवीर-ई’ यानी एक्सटेंडेड अग्निवीर के रूप में नामित किया जा सकता है। इस अवधि में उन्हें बढ़ा हुआ वेतन और कुछ अतिरिक्त सुविधाएं मिलने की संभावना भी जताई गई है।
ड्यूटी के दौरान मौत पर परिवार को पेंशन का इंतजार
अग्निवीरों के लिए शादी के नियमों में संभावित बदलाव की चर्चा के बीच पेंशन का मुद्दा अब भी बरकरार है। मौजूदा व्यवस्था के तहत ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीरों के परिवार को नियमित सैनिकों की तरह पारिवारिक पेंशन नहीं मिलती है।
इसके विपरीत, ड्यूटी के दौरान शहीद या जान गंवाने वाले नियमित सैनिकों के पात्र परिवार के सदस्यों को पारिवारिक पेंशन का प्रावधान है।
इससे पहले सशस्त्र बलों की ओर से सुझाव दिया गया था कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीरों के आश्रितों को जीवनभर निर्वाह भत्ता दिया जाना चाहिए। इसमें माता-पिता और आश्रित भाई-बहनों को शामिल करने का प्रस्ताव भी था।
विकलांगता पेंशन पर भी फैसला बाकी
अग्निवीरों से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा विकलांगता पेंशन का है। मौजूदा नियमों के अनुसार, सेवा के दौरान विकलांगता होने पर अग्निवीरों को एकमुश्त मुआवजा दिया जाता है, लेकिन नियमित सैनिकों की तरह जीवनभर विकलांगता पेंशन का प्रावधान नहीं है।
फिलहाल अग्निवीरों की शादी, सेवा विस्तार, पारिवारिक पेंशन और विकलांगता से जुड़े नियमों में संभावित बदलाव को लेकर चर्चा जारी है। शादी की अनुमति और अन्य सुविधाओं पर अंतिम सरकारी निर्णय का इंतजार है।











