सोशल संवाद / डेस्क : घाटशिला स्थित सोना देवी विश्वविद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के उपलक्ष्य में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में आम, लीची, अमरूद, केला, जामुन और शहतूत समेत कई फलदार पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुआ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से कम से कम एक फलदार पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की। साथ ही प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह बंद करने और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया।
15 से 23 मई तक चल रहा पर्यावरण जागरूकता अभियान
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्देशानुसार सोना देवी विश्वविद्यालय में 15 मई से 23 मई तक पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रतिदिन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह अभियान विश्व पर्यावरण दिवस 2026 से पहले चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी पूर्व-अभियान का हिस्सा है।
इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम “जलवायु परिवर्तन” रखी गई है। इसका उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना और समाज में ग्रह-हितैषी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।
विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ाया जा रहा हरित क्षेत्र
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह के नेतृत्व में परिसर में हरियाली बढ़ाने के लिए विशेष पहल की जा रही है। विभिन्न फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों ने मिलकर दर्जनों पौधे लगाए। इसके अलावा वर्षा जल संरक्षण के लिए भी विश्वविद्यालय परिसर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
प्रबंधन ने बताया कि आने वाले समय में ऊर्जा संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और ई-वेस्ट में कमी लाने के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा। विश्वविद्यालय का लक्ष्य विद्यार्थियों के बीच पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सतत विकास की सोच को मजबूत करना है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए युवाओं की भूमिका अहम
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए युवाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। छोटे-छोटे प्रयास, जैसे पौधारोपण, प्लास्टिक का कम उपयोग और ऊर्जा की बचत, भविष्य के लिए बड़ा बदलाव ला सकते हैं।










