---Advertisement---
Banner 1
Banner 2

जल-जंगल-जमीन तथा आदिवासी समाज के अस्तित्व की रक्षा के लिए एक और हूल की जरूरत : चम्पाई सोरेन

By Riya Kumari

Published :

Follow
जल-जंगल-जमीन तथा आदिवासी समाज के अस्तित्व की रक्षा के लिए एक और हूल की जरूरत : चम्पाई सोरेन

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने आज राज्य की महागठबंधन सरकार को आदिवासी- मूलवासी विरोधी करार देते हुए उस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सरकार आदिवासी महापुरुषों का गौरवशाली इतिहास मिटाने की साजिश रच रही है।

यह भी पढे : गम्हरिया में सुधा डेयरी गेट पर अनिश्चितकालीन धरना, कर्मी की संदिग्ध मौत पर परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल

वीर सिदो-कान्हू के वंशज मंडल मुर्मू को हूल दिवस पर भोगनाडीह में सामाजिक कार्यक्रम करने की इजाजत नहीं मिलने, तथा प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को नोटिस जारी करने से खासे नाराज पूर्व सीएम ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस धरती से अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हूल क्रांति की शुरुआत हुई, आज उसी स्थान पर आदिवासी समाज को बंदिशों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि देश के लिए अपनी जान देने वाले इन वीरों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनके वंशजों को, उन्हें नमन करने से पहले एक तानाशाही सरकार से इजाजत लेनी होगी, और बॉन्ड भरना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष इसी सरकार ने हूल दिवस के दिन शहीद परिवार के वंशजों एवं भोगनाडीह के ग्रामीणों पर लाठी चार्ज करवाया था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें खुशी है कि भोगनाडीह के ग्रामीणों ने सरकार के सामने ना झुकते हुए, कोर्ट जाने और बॉन्ड भरने से इनकार कर दिया। सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि अब ना तो ब्रिटिश साम्राज्यवाद है, ना ही राजतंत्र। वीर सिदो-कान्हू की विरासत को मिटाने की कोशिश करने वालों को जनता मिट्टी में मिला देगी।

संथाल परगना की बदलती डेमोग्राफी का मुद्दा उठाते हुए चम्पाई सोरेन ने कहा कि पाकुड़ जिले में आदिवासियों – मूलवासियों की 15 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन पर बांग्लादेशी घुसपैठियों का कब्जा है। दुमका, साहेबगंज से लेकर गिरिडीह तक यही हालात हैं। ये घुसपैठिये हमारी बहु-बेटियों की अस्मत से खेल रहे हैं, सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ रहे हैं, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी बैठी हुई है। इसे रोकने के लिए एक बड़े जन-आंदोलन की जरूरत है।

वे हूल दिवस के अवसर पर आदिवासी सांवता सुसार अखाड़ा द्वारा स्थानीय कन्वेंशन हॉल में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने दुमका पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में आदिवासी समाज से जुड़े कई विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, कलाकारों, समाजसेवियों एवं मार्गदर्शकों को सम्मानित किया गया।

इस से पहले चम्पाई सोरेन दिशोम मांझी थान पहुंचे, जहां उन्होंने पारंपरिक विधि से पूजा अर्चना की, एवं पौधारोपण भी किया। तत्पश्चात उन्होंने पोखरा चौक पर वीर सिदो-कान्हू की प्रतिमा को माल्यार्पण कर आदिवासी अस्मिता एवं अस्तित्व की लड़ाई को तेज करने का संकल्प लिया।

इस कार्यक्रम में कटोरिया विधानसभा क्षेत्र (बिहार) से विधायक श्री पूरन लाल टुडू, पूर्व मंत्री रणधीर सिंह, चंद्रमोहन हांसदा समेत आदिवासी समाज के कई बुद्धिजीवी एवं गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

संबंधित पोस्ट

Exit mobile version