सोशल संवाद/जमशेदपुर : चीनी और प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने केंद्र और झारखंड सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को टैग कर सोशल मीडिया पर कहा कि चीनी और प्याज के बाजार में कार्टेल, जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर तत्काल अंकुश लगाया जाए। उन्होंने चीनी को पुराने रेट पर बाजार में उपलब्ध कराने की भी मांग की।

यह भी पढे : JPSC-JSSC Recruitment Reform Yatra: 24 अगस्त से नेमरा से शुरू होगी यात्रा, 24 जिलों में अभियान
सरयू राय ने कहा कि चीनी और प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर झारखंड के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। झारखंड में बड़ी मात्रा में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति दूसरे राज्यों से होती है। ऐसे में दूसरे राज्यों की मिलों और मंडियों में कीमत बढ़ने का असर यहां के थोक और खुदरा बाजार पर भी पड़ सकता है।
मिल रेट में बढ़ोतरी पर उठाए सवाल
सरयू राय ने 22 अगस्त के उपलब्ध मिल रेट का हवाला देते हुए चीनी की कीमतों में तेजी पर सवाल उठाया। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश की सहकारी चीनी मिलों में चीनी का रेट करीब ₹5,820 से ₹6,000 प्रति क्विंटल है। वहीं, उत्तर प्रदेश स्टेट शुगर कॉरपोरेशन की मोहीउद्दीनपुर मिल में ₹6,000 और पिपराइच व मुंडेरवा में ₹6,200 प्रति क्विंटल का रेट बताया गया है।
महाराष्ट्र में भी चीनी के दाम इससे अधिक हैं। छत्रपति संभाजी राजे सहकारी चीनी उद्योग लिमिटेड ने एम-30 चीनी का रेट ₹6,800, एसएस-30 का ₹6,700 और एस-30 का ₹6,675 प्रति क्विंटल तय किया है। इन दरों पर जीएसटी अलग से है। यानी मिल स्तर पर चीनी की कीमत करीब ₹66.75 से ₹68 प्रति किलो तक पहुंच गई है।
नई फसल आने से पहले कीमत बढ़ने पर सवाल
सरयू राय ने कहा कि करीब एक से डेढ़ महीने में गन्ने की नई फसल आने वाली है। ऐसे समय में चीनी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी समझ से परे है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नई फसल आने में ज्यादा समय नहीं बचा है, तो अभी कीमत बढ़ाकर आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने का क्या औचित्य है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों की लगातार निगरानी की जाए। साथ ही मिलों, थोक कारोबारियों और बड़े स्टॉकिस्टों के पास मौजूद चीनी के स्टॉक की जांच हो, ताकि जमाखोरी के जरिए कृत्रिम महंगाई न पैदा की जा सके।
जमाखोरी पर कार्रवाई की मांग
सरयू राय ने कहा कि सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि चीनी मिलों के पास कितना स्टॉक है, थोक व्यापारियों ने कितना माल जमा कर रखा है और बाजार में वास्तविक आपूर्ति कितनी हो रही है। यदि कहीं तय सीमा से अधिक स्टॉक मिलता है तो तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को कीमत बढ़ने का इंतजार करने के बजाय अभी से बाजार की निगरानी शुरू करनी चाहिए। खासकर जमशेदपुर, रांची और धनबाद जैसे बड़े बाजारों में थोक कीमत और स्टॉक की नियमित जानकारी जुटाई जानी चाहिए।
प्याज की कीमतों पर भी चिंता
सरयू राय ने प्याज की बढ़ती कीमतों को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज के दाम बढ़ रहे हैं और जमाखोरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने नाफेड की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप का असर बाजार में दिखाई देना चाहिए।
महंगाई से छोटे कारोबार भी प्रभावित
सरयू राय ने कहा कि चीनी और प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल घरेलू बजट तक सीमित नहीं रहेगा। होटल-रेस्तरां, मिठाई की दुकानें और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे कारोबार भी इससे प्रभावित होंगे।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से कार्टेल, कृत्रिम कमी और जमाखोरी के खिलाफ एक साथ कार्रवाई करने की मांग की, ताकि उपभोक्ताओं को अनावश्यक महंगाई से राहत मिल सके।









