सोशल संवाद/डेस्क /रिपोर्ट-संजय सिन्हा: ओडिशा के केंदुझर जिले से इंसानियत और व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहां सिस्टम से परेशान एक बेबस भाई अपनी मृत बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया, जिसे देखकर बैंक परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
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जानकारी के मुताबिक, जीतु मुंडा अपनी बहन कलरा मुंडा के बैंक खाते में जमा 20 हजार रुपये निकालना चाहता था। इसके लिए वह कई बार बैंक गया, लेकिन बैंक कर्मचारियों ने यह कहकर भुगतान देने से इनकार कर दिया कि राशि केवल खाताधारक को ही दी जा सकती है। जीतु ने कई बार बताया कि उसकी बहन की मौत हो चुकी है, लेकिन उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।
बार-बार बैंक के चक्कर लगाने और किसी तरह की मदद नहीं मिलने से परेशान जीतु मुंडा ने बेहद दर्दनाक कदम उठाया। वह अपनी बहन के शव को कब्र से निकालकर उसका कंकाल करीब तीन किलोमीटर तक पैदल ढोते हुए मल्लिपसी स्थित ग्रामीण बैंक पहुंचा और बैंक परिसर के बरामदे में रख दिया। कंकाल देखते ही वहां मौजूद लोगों और बैंक कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के अनुसार, जीतु अनपढ़ है और उसे कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं थी। प्रशासन ने उसे समझाया और भरोसा दिलाया कि जल्द ही बैंक खाते से पैसे निकालने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके बाद कंकाल को दोबारा कब्रिस्तान में दफना दिया गया।
यह घटना कई बड़े सवाल खड़े करती है। आखिर एक अनपढ़ और गरीब व्यक्ति को इतनी बड़ी परेशानी का सामना क्यों करना पड़ा? क्या उसे सही कानूनी जानकारी और मदद नहीं मिलनी चाहिए थी? और सबसे बड़ा सवाल, क्या समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गई है?









