सोशल संवाद/डेस्क : देश में अब कारों की कीमत बढ़ने जा रही है। मारुति और हुंडई के बाद अब टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड ने अपनी कारों और एसयूवी की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड ने पेट्रोल-डीजल इंजन और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया है। नई कीमतें एक सितंबर से लागू होंगी। वाहनों की कीमतों में अधिकतम 25,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की जाएगी।
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शुक्रवार को कंपनी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला कच्चा माल महंगा होने, अन्य इनपुट लागत में बढ़ोतरी और लगातार महंगाई का दबाव बने रहने के कारण लिया गया है। कंपनी का कहना है कि लागत बढ़ने के एक बड़े हिस्से को वह खुद वहन कर रही है, जबकि कुछ बोझ कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए ग्राहकों पर डाला जा रहा है।
इस तिमाही में दूसरी बार बढ़ रही कीमत: टाटा मोटर्स की ओर से यह इस तिमाही में कीमत बढ़ाने का दूसरा ऐलान है। इससे पहले जून में कंपनी ने अपने यात्री वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 1.5 फीसदी तक बढ़ोतरी की थी। यह बढ़ोतरी एक जुलाई 2026 से लागू हुई थी। अब सितंबर से एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है।
नए उत्सर्जन नियम, फीचर्स से भी बढ़े दाम :
लगातार बढ़ती लागत और महंगाई के कारण ही कारें महंगी नहीं हुईं। एसयूवी की बिक्री बढ़ना, ग्राहकों का महंगे वेरिएंट की ओर जाना, सुरक्षा और उत्सर्जन नियमों में बदलाव तथा ज्यादा फीचर्स भी औसत कीमत बढ़ने की बड़ी वजह हैं। भारत में नई कारों की औसत कीमत की बात करें, तो पिछले पांच-छह साल में कारें काफी महंगी हुई हैं। उपलब्ध उद्योग आंकड़ों के मुताबिक 2019 में एक नई कार की औसत रिटेल कीमत करीब 8.07 लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 11.64 लाख और 2025 के शुरुआती आंकड़ों में करीब 11.84 लाख हो गई।
मारुति सुजुकी की कारें पहले से हो चुकी महंगी
मारुति ने अगस्त में लागत में बढ़ोतरी का हवाला देकर एरिना और नेक्सा चैनलों के 18 मॉडल्स की कीमतों में ढाई हजार से लेकर 30 हजार तक की वृद्धि की है। ऑल्टो की कीमतों में करीब ढाई हजार तो वहीं, स्विफ्ट और ब्रेजा की कीमतों में पांच से साढ़े सात हजार तक बढ़ोतरी हुई।









