मोबाइल-टैबलेट से बच्चों की आंखें हो रहीं खराब

By Riya Kumari

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मोबाइल-टैबलेट से बच्चों की आंखें हो रहीं खराब

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सोशल संवाद /जमशेदपुर : आज के दौर में बच्चों के बीच मोबाइल, टैबलेट व अन्य डिजिटल स्क्रीन का बढ़ता उपयोग उनकी आंखों को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है l जमशेदपुर ऑप्थेल्मोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से साकची के जमशेदपुर आई हॉस्पिटल में आयोजित कार्यशाला में अस्पताल के अधीक्षक डॉ एसपी जखनवाल ने उक्त बातें कही. उन्होंने बताया कि संस्थान द्वारा चलाये जा रहे ‘स्कूल टीचर कार्यक्रम’ के तहत बीते एक वर्ष में 29 स्कूलों के 39 शिक्षकों को बच्चों में नजर कमजोर होने के शुरुआती संकेत पहचानने का प्रशिक्षण दिया गया है l इसके जरिए अब तक 1516 बच्चों की पहचान कर आंखों की जांच करायी गयी. इनमें 300 बच्चों की नजर कमजोर पाई गई और उन्हें चश्मा लगाने की सलाह दी गई l इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन टीएमएच की जीएम डॉ वनिता सिंह ने किया. कार्यशाला में डॉ नितेश सिंह, डॉ एसके मित्रा, डॉ नेहा, डॉ अंजली सिंह, डॉ अरुण पांडे, डॉ राजीव राजीव शुक्ला समेत शहर के 50 से अधिक नेत्र रोग विशेषज्ञ शामिल थे l

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ग्रुप प्रैक्टिस से होगा मरीजों का सटीक इलाज

कार्यशाला में उपस्थित चिकित्सकों ने जिले में बेहतर नेत्र चिकित्सा के लिए ग्रुप प्रैक्टिस मॉडल अपनाने की पहल कीl डॉक्टरों ने कहा कि इस मॉडल से शहर के अलग-अलग विशेषज्ञ आपसी समन्वय और आधुनिक तकनीकों का साझा उपयोग कर मरीजों को एक ही छत के नीचे बेहतर इलाज करेंगेl इससे मरीजों को मोतियाबिंद, कॉर्निया, रेटिना या ओकुलोप्लास्टी जैसी जटिल समस्याओं के लिए रांची, कोलकाता या भुवनेश्वर जैसे बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा l

बायोमीट्री की आधुनिक तकनीक का दिया गया प्रशिक्षण

कार्यशाला में बायोमीट्री की आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया गया. विशेषज्ञों के अनुसार, मोतियाबिंद ऑपरेशन में इंट्राऑक्यूलर लेंस की सटीक पावर तय करने में बायोमीट्री की अहम भूमिका है, जिससे ऑपरेशन के बाद मरीजों की दृष्टि बेहतर होती है l

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