सोशल संवाद / डेस्क : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में एक महिला पत्रकार मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश करती नजर आती हैं। वीडियो में मुख्यमंत्री हाथ के इशारे से उन्हें रोकते हुए आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। उनके साथ मंच पर मौजूद बीजेपी के अन्य नेता भी वहां से चले जाते हैं।
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महिला पत्रकार की पहचान दिव्या श्रीवास्तव के तौर पर हुई है। उन्होंने एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में दावा किया कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश के बाद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ अभद्रता की। उन्होंने सोशल मीडिया पर धमकी मिलने और डराए जाने का भी आरोप लगाया है।
मुख्यमंत्री से क्या सवाल पूछना चाहती थीं पत्रकार?
दिव्या श्रीवास्तव के मुताबिक, वह स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर काम करती हैं और इससे पहले भी बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होती रही हैं। उन्होंने बताया कि वह उत्तर प्रदेश में बारिश के बाद जलभराव और एक्सप्रेस-वे से जुड़ी समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल करना चाहती थीं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री करीब आधे घंटे तक बोलने के बाद जब कार्यक्रम से जाने लगे, तब उन्होंने सवाल पूछने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सवाल करने का मौका नहीं मिला।
पत्रकार ने लगाया धमकी मिलने का आरोप
दिव्या श्रीवास्तव ने दावा किया कि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है और यहां तक कि घर पर बुलडोजर चलाने जैसी धमकियां भी दी गई हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वह लखनऊ में अकेली रहती हैं और ऐसे माहौल में उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है।
BJP ने कहा- प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल-जवाब का सेशन नहीं था
बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने पत्रकार के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन बीजेपी के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के बारे में जानकारी देने के लिए किया गया था और इसमें सवाल-जवाब का कोई सत्र निर्धारित नहीं था।
बीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल-जवाब होंगे या नहीं, यह मॉडरेटर तय करता है। उन्होंने पत्रकार की ओर से लगाए गए अन्य आरोपों पर भी सवाल उठाए।
हालांकि, राकेश त्रिपाठी ने यह भी कहा कि अगर किसी पत्रकार या महिला को सोशल मीडिया पर धमकी मिलती है तो उसे पुलिस में शिकायत करनी चाहिए और पुलिस को मामले में कार्रवाई करनी चाहिए।
विपक्षी दलों ने पत्रकार के समर्थन में उठाए सवाल
मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री प्रेस के सवालों का जवाब नहीं दे सकते तो चुनाव में जनता के सवालों का जवाब कैसे देंगे।
आम आदमी पार्टी ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बीजेपी सवालों से बचती रही है।
वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव के समर्थन में कहा कि पत्रकार का काम सत्ता से सवाल पूछना है और सवाल पूछने पर धमकी देना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने भी सोशल मीडिया के जरिए इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए महिला पत्रकार के समर्थन में अपनी बात रखी।
वायरल वीडियो को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ पत्रकार की ओर से सवाल पूछने से रोकने और बाद में धमकी मिलने के आरोप लगाए गए हैं, वहीं बीजेपी ने कहा है कि कार्यक्रम में सवाल-जवाब का सत्र था ही नहीं।
फिलहाल विवाद के केंद्र में वायरल वीडियो, पत्रकार के आरोप और बीजेपी की सफाई है। सोशल मीडिया पर अलग-अलग राजनीतिक दल और नेता इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।










