सोशल संवाद / नई दिल्ली : मोदी सरकार द्वारा भारतीय सैनिकों की डिसेबिलिटी पेंशन (दिव्यांगता पेंशन) पर आयकर लगाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कांग्रेस ने इसे सेना के मान-सम्मान पर आघात बताया है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के चेयरमैन कर्नल रोहित चौधरी और कर्नल एसपी सिंह ने मोदी सरकार की बदनीयती पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो सरकार खुद को राष्ट्रवादी बताती है, वह कुछ करोड़ रुपयों के लिए सैनिकों के मनोबल को तोड़ने का काम कर रही है।
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कर्नल रोहित चौधरी ने कहा कि 1922 के इनकम टैक्स एक्ट में युद्ध और ड्यूटी के दौरान घायल होने वाले सैनिकों को कर से छूट दी गई थी। 1961 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री रहते हुए जब इनकम टैक्स एक्ट दोबारा बना, तब भी सैनिकों की डिसेबिलिटी पेंशन को टैक्स से बाहर रखा गया। लेकिन मोदी सरकार की नई नीति के तहत अब केवल वे सैनिक जो युद्ध में घायल होकर सेवा से बाहर हो गए हैं, उन्हीं को कर से छूट मिलेगी। जबकि जो सैनिक घायल होने के बाद भी सेवा में बने हुए हैं, उनकी डिसेबिलिटी पेंशन को टैक्स योग्य आय माना जा रहा है।
कर्नल रोहित चौधरी ने बताया कि मोदी सरकार 2016 से लेकर अब तक जानबूझकर डिसेबिलिटी पेंशन को बंद करने या उसे आयकर के दायरे में लाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अब एक फरवरी, 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट के माध्यम से केंद्र सरकार आयकर अधिनियम में संशोधन कर डिसेबिलिटी पेंशन पर पूर्ण कर छूट को केवल उन सैन्य कर्मियों तक सीमित करने का प्रस्ताव कर रही है जिन्हें शारीरिक दिव्यांगता के कारण सेवा से बाहर किया गया हो।
उन्होंने बताया कि इससे पहले भी मोदी सरकार ने 2016 में एक अधिसूचना जारी कर डिसेबिलिटी पेंशन पर टैक्स लगाने की कोशिश की थी, जिसे दबाव में उसे वापस लेना पड़ा था। 24 जून 2019 को फिर से एक नोटिफिकेशन जारी कर युद्ध में घायल होने पर सेवा से बाहर किए गए सैनिकों को छोड़कर अन्य सभी दिव्यांग सैनिकों को आयकर के दायरे में ला दिया गया, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसके बावजूद सरकार ने डिसेबिलिटी पेंशन पर टैक्स लगाने के अपने नापाक इरादे को नहीं छोड़ा। इसके बाद सरकार नई डिसेबिलिटी नीति-2023 लेकर आई, जिसमें डिसेबिलिटी पेंशन का नाम बदलकर ‘इम्पेयरमेंट रिलीफ’ कर दिया गया। नई नीति लागू होने के बाद डिसेबिलिटी पेंशन स्वतः ही आयकर के दायरे में आ गई। कर्नल चौधरी ने मोदी सरकार की इस नीति को सैनिकों का अपमान बताते हुए कहा कि जो सैनिक घायल होने के बावजूद सेवा में बने हुए हैं, उन्हें अब ‘इम्पेयरमेंट रिलीफ’ के नाम पर कर देना पड़ रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि किसी सैनिक की डिसेबिलिटी पेंशन क्या उसकी आय हो सकती है? उन्होंने कहा कि अगर मोदी सरकार ऐसा मानती है तो इससे शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता। इसे सैनिकों के सम्मान पर आघात बताते हुए उन्होंने कहा कि देश में करीब दो लाख दिव्यांग सैनिक हैं और लगभग 50 लाख सर्विंग, पूर्व सैनिक और वॉर नारियां हैं। ऐसे में सरकार का यह रुख करीब 58 लाख लोगों को प्रभावित करेगा। उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार केवल 100-125 करोड़ रुपये के लिए देश के सैनिकों के मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने पूछा कि अगर सरकार बड़े उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये माफ कर सकती है, तो सैनिकों के लिए इतनी छोटी रकम का प्रावधान क्यों नहीं कर सकती।
भारत के पूर्व फील्ड मार्शल जनरल सैम मानेकशॉ का उदाहरण देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि वे बर्मा अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए थे, लेकिन बाद में 1971 के युद्ध में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि घायल अधिकारियों को सेवा में बनाए रखना परंपरा का हिस्सा रहा है और इसका उद्देश्य सेना और जवानों का मनोबल बढ़ाना होता है।
कर्नल एस.पी. सिंह ने सवाल उठाया कि क्या नरेंद्र मोदी सरकार सैनिकों का बजट काटकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है? उन्होंने कहा कि सेना के साथ सरकार का ऐसा रवैया बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
कर्नल रोहित चौधरी ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पूर्व सैनिकों का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी से मिला था और अपनी चिंताएं उनके सामने रखी थीं। राहुल गांधी ने आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाएंगे और कांग्रेस के सत्ता में आने पर डिसेबिलिटी पेंशन को फिर से आयकर के दायरे से बाहर किया जाएगा।
कर्नल रोहित चौधरी ने मांग की कि 1922 के प्रावधान के तहत जो सैनिक घायल होने के बाद भी सेवा दे रहे हैं, उनकी डिसेबिलिटी पेंशन को इनकम टैक्स से बाहर रखा जाए। 2023 में लाई गई नई डिसेबिलिटी नीति वापस ली जाए। डिसेबिलिटी पेंशन में किसी भी प्रकार का वर्गीकरण न किया जाए।
कर्नल रोहित ने बताया कि 28 फरवरी तक डिसेबिलिटी पेंशन को लेकर यह फैसला वापस नहीं लिया जाता है, तो कांग्रेस पार्टी एक अभियान शुरू करेगी। 01 मार्च को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ता अपने सैनिकों के मान-सम्मान के लिए आवाज उठाएंगे। इसके बावजूद भी सरकार नहीं मानी, तो एक तारीख तय कर संसद सत्र के दौरान दिल्ली में सैनिकों का आंदोलन शुरू किया जाएगा और सरकार से सवाल पूछे जाएंगे।










