सोशल संवाद/ रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति की आय तय करते समय ओवरटाइम से होने वाली अतिरिक्त कमाई का भी सीमित अनुमान लगाया जा सकता है। इसके लिए वेतन प्रमाणपत्र में ओवरटाइम का उल्लेख होना जरूरी नहीं है, बशर्ते अतिरिक्त काम और परिवार की परिस्थितियों से इसकी संभावना बनती हो। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की एकल पीठ ने जमेशदपुर कोर्ट के आदेश के बाद टाटा एआईजी इंश्योरेंस की अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
यह भी पढ़े: हरदीप सिंह पुरी-जेफरी एपस्टीन की तस्वीरों पर विवाद, विपक्ष ने उठाए सवाल
मामले में मृतक सुरक्षागार्ड के वेतन प्रमाणपत्र के अनुसार उसका अंतिम मासिक वेतन 11,684 रुपये था। ट्रिब्यूनल ने इसे 11,700 रुपये मानते हुए ओवरटाइम की मद में 5,000 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त जोड़कर आय 16,700 रुपये तय की थी। बीमा कंपनी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वेतन प्रमाणपत्र में ओवरटाइम का कोई उल्लेख नहीं है। सहकर्मी ने भी अपनी गवाही में ओवरटाइम की कमाई की पुष्टि नहीं की थी और नियोक्ता को भी गवाही के लिए नहीं बुलाया गया था।
पत्नी ने कहा था- 10 हजार कमाते थे अतिरिक्तः वहीं, मृतक की पत्नी ने अदालत को बताया कि उनके पति ओवरटाइम करके हर महीने करीब 10,000 रुपये अतिरिक्त कमाते थे। हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही इस कमाई का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, लेकिन अतिरिक्त काम से कुछ आय होने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सुरक्षा गार्ड अक्सर अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं। रात में ड्यूटी करने वाले गार्ड के पास दिन में अतिरिक्त काम करने का समय हो सकता है।
7.5 प्रतिशत भी देना होगा सालाना ब्याज
आय का आकलन घटाने के बावजूद हाईकोर्ट ने मुआवजे की गणना के अन्य पहलुओं में सुधार करते हुए कुल मुआवजा 34, 16,650 रुपये से बढ़ाकर 35,37,000 रुपये कर दिया। अदालत ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में निर्धारित सिद्धांतों का पालन किया। अदालत ने मुआवजे की राशि पर दावा याचिका दायर करने की तारीख दो सितंबर 2022 से भुगतान तक 7.5 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया।
तीन बच्चों और माता-पिता की जिम्मेदारी भी देखी
झारखंड हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि मृतक अपने पीछे पत्नी, तीन नाबालिग बच्चों और माता-पिता को छोड़ गया था। ऐसे में निर्धारित ड्यूटी के अतिरिक्त काम कर कुछ और कमाई करने की संभावना को पूरी तरह अनुचित नहीं कहा जा सकता। हालांकि, सहकर्मी की गवाही में ओवरटाइम का जिक्र नहीं होने को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अतिरिक्त आय का अनुमान 2,300 रुपये प्रतिमाह तय किया। इस तरह मृतक की मासिक आय 16,700 रुपये के बजाय 14,000 रुपये मानी गई।










