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क्या जेल जाने पर PM और CM को पद छोड़ना होगा? जानिए क्या है पूरा प्रस्ताव

By Tamishree Mukherjee

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Constitution 130th Amendment Bill 2025, PM CM Removal Bill

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सोशल संवाद / डेस्क : केंद्र सरकार आगामी संसद के मानसून सत्र में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 (Constitution 130th Amendment Bill 2025) को आगे बढ़ा सकती है। यह प्रस्तावित विधेयक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों के कारण चर्चा में है। हालांकि, फिलहाल यह कानून नहीं बना है और इसके संसद से पारित होने की प्रक्रिया अभी बाकी है।

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बताया जा रहा है कि इस विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को कुछ संशोधनों के साथ मंजूरी दे सकती है। इसके बाद केंद्र सरकार रिपोर्ट पर विचार कर विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेज सकती है। यदि कैबिनेट की स्वीकृति मिलती है तो इसे संसद के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

क्या है Constitution (130th Amendment) Bill 2025?

यह विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा अगस्त 2025 में पेश किया गया था। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य ऐसे मामलों में स्पष्ट संवैधानिक व्यवस्था करना है, जहां प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होकर लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहें।

प्रस्ताव के अनुसार, यदि किसी ऐसे अपराध में गिरफ्तारी होती है, जिसमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है और संबंधित व्यक्ति लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसके पद पर बने रहने को लेकर कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है।

प्रस्तावित कानून में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार—

  • पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले गंभीर अपराधों में गिरफ्तारी होने पर नियम लागू हो सकते हैं।
  • यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री लगातार 30 दिन न्यायिक हिरासत में रहते हैं, तो उनके पद पर बने रहने पर निर्णय लिया जा सकता है।
  • प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति या राज्यपाल, संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आदेश जारी कर सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में 31वें दिन से यह प्रक्रिया स्वतः प्रभावी होने का भी प्रस्ताव है।

हालांकि, यह सभी प्रावधान अभी केवल प्रस्तावित हैं और अंतिम रूप संसद में चर्चा तथा संशोधनों के बाद ही तय होगा।

JPC किन बदलावों की सिफारिश कर सकती है?

सूत्रों के अनुसार, संयुक्त संसदीय समिति विधेयक के मूल उद्देश्य को बरकरार रखते हुए कुछ सुरक्षा उपाय (Safeguards) जोड़ने की सिफारिश कर सकती है।

संभावित सुझावों में शामिल हैं—

  • कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान।
  • किन अपराधों को “गंभीर अपराध” माना जाएगा, इसकी स्पष्ट परिभाषा।
  • यह सुनिश्चित करना कि प्रावधान केवल गंभीर मामलों में ही लागू हों।

सरकार का पक्ष क्या है?

JPC की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने कहा है कि समिति के सामने किसी सदस्य ने विधेयक की मूल मंशा पर सवाल नहीं उठाया। उनके अनुसार इस कानून का उद्देश्य राजनीति का अपराधीकरण रोकना और संवैधानिक नैतिकता को मजबूत करना है।

गृह मंत्री अमित शाह भी इस विधेयक का समर्थन कर चुके हैं। उनका कहना है कि कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल में रहते हुए अपने संवैधानिक पद का प्रभावी ढंग से संचालन नहीं कर सकता।

विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?

विपक्षी दल इस प्रस्तावित कानून का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि—

  • केवल न्यायिक हिरासत के आधार पर निर्वाचित प्रतिनिधि को पद से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ हो सकता है।
  • इसका राजनीतिक दुरुपयोग संभव है।
  • इससे राज्य सरकारों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
  • नए आपराधिक कानूनों के तहत लंबी न्यायिक हिरासत का प्रावधान होने के कारण सरकारें विपक्षी नेताओं को निशाना बना सकती हैं।

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी और CPI नेता डी. राजा सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

क्या संसद से पास हो पाएगा यह बिल?

संविधान संशोधन विधेयक होने के कारण इसे संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (दो-तिहाई बहुमत) की आवश्यकता होगी। यदि विधेयक संसद से पारित होता है, तो जिन प्रावधानों पर राज्यों की मंजूरी आवश्यक होगी, वहां राज्य विधानसभाओं की स्वीकृति भी लेनी पड़ सकती है। ऐसे में इस विधेयक का भविष्य संसद में होने वाली चर्चा, विपक्ष के रुख और सरकार के समर्थन जुटाने की क्षमता पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

Constitution (130th Amendment) Bill 2025 फिलहाल एक प्रस्तावित विधेयक है, कानून नहीं। इसका उद्देश्य गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक हिरासत में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के पद को लेकर स्पष्ट संवैधानिक व्यवस्था करना बताया जा रहा है। हालांकि, विपक्ष इसके संभावित राजनीतिक दुरुपयोग और संवैधानिक प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहा है। अब सबकी नजर आगामी मानसून सत्र और JPC की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है।

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