सोशल संवाद / डेस्क : महाराष्ट्र सरकार ने स्कूलों में बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने स्कूल परिसरों और उनके आसपास जंक फूड की बिक्री पर सख्ती करने के निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत वड़ा पाव, समोसा, चिप्स, शक्करयुक्त पेय और अन्य अनहेल्दी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया गया है।
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क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि बच्चों में बढ़ते मोटापे, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए स्कूलों में पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देना जरूरी है। लंबे समय से विशेषज्ञ भी बच्चों को जंक फूड से दूर रखने की सलाह देते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए स्कूल कैंटीन और आसपास के खाद्य पदार्थों की बिक्री के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
किन खाद्य पदार्थों पर रहेगी रोक?
नए नियमों के तहत स्कूलों में या उनके आसपास निम्नलिखित जंक फूड बेचने पर प्रतिबंध लगाया गया है:
- वड़ा पाव
- समोसा
- चिप्स
- बर्गर
- पिज्जा
- फ्रेंच फ्राइज
- शक्करयुक्त कोल्ड ड्रिंक्स
- चॉकलेट और कैंडी
- अन्य हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट वाले खाद्य पदार्थ
बच्चों को मिलेगा हेल्दी विकल्प
सरकार ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि कैंटीन में पौष्टिक और संतुलित भोजन उपलब्ध कराया जाए। इसमें फल, अंकुरित अनाज, दूध, दही, ताजा जूस, सलाद और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
स्कूलों और कैंटीन संचालकों को क्या करना होगा?
- जंक फूड की बिक्री बंद करनी होगी।
- हेल्दी फूड मेन्यू अपनाना होगा।
- स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन करना होगा।
- बच्चों में स्वस्थ खानपान के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी।
बच्चों की सेहत पर पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चे नियमित रूप से पौष्टिक भोजन करेंगे तो उनकी शारीरिक और मानसिक सेहत बेहतर होगी। इससे मोटापा, डायबिटीज और अन्य लाइफस्टाइल बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है।
महाराष्ट्र सरकार का यह कदम स्कूलों में स्वस्थ खानपान की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इन नियमों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है, तो बच्चों की सेहत में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।









