सोशल संवाद/जमशेदपुर : अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और स्थानीय समुदायों को जल, जंगल, जमीन और अपने पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अब दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पेसा कानून के जरिए अब ग्राम सभाओं को सक्षम बनाने की प्रशासनिक स्तर पर तैयारी पूरी कर ली गई है।
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इसी सिलसिले में शुक्रवार को उपायुक्त कार्यालय सभागार में डीसी राजीव रंजन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यशाला हुई। इसमें डीडीसी नागेंद्र पासवान, एसडीओ अर्णव मिश्रा, डीसीएलआर सच्चितानंद महतो सहित जिले के सभी बीडीओ, सीओ, सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध जनों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पेसा कानून के प्रावधानों को समझना, ग्राम सभाओं को व्यवहारिक रूप से सुदृढ़ करना और सरकारी योजनाओं में सीधे जनता की भागीदारी तय करना था। उपायुक्त ने दो टूक शब्दों में कहा कि ग्राम सभाओं के अधिकार कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखने चाहिए। पेसा नियमावली अनुसूचित क्षेत्रों में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को मजबूत करने और सत्ता का असली अधिकार सीधे जनता के हाथों में सौंपने का सबसे बड़ा माध्यम है। सरकार की किसी भी विकास योजना को सफल बनाना है, तो स्थानीय समुदायों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना ही होगा। पेसा नियमावली के माध्यम से ग्राम सभाओं को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार मिलेंगे। इससे विकास कार्यों में न
सिर्फ पारदर्शिता आएगी बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी।
डीसी ने जिले के सभी बीडीओ और सीओ को सख्त आदेश दिया कि वे इस नियमावली के एक-एक प्रावधान का गहराई से अध्ययन करें। ग्रामीण इलाकों में ग्राम सभाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाएं। कार्यशाला के दौरान सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सीधे संवाद के माध्यम से कई जिज्ञासाओं और व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों ने माना कि कानून बेहद मजबूत है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण अभी ग्राम सभाएं अपने अधिकारों को पूरी तरह नहीं समझ पा रही हैं।
पेसा कानून लागू होने के फायदे :
गांव की सीमा के भीतर आने वाले लघु वन उपज, जल स्त्रोतों और बालू-पत्थर जैसे खनिजों के प्रबंधन और संरक्षण का पहला अधिकार ग्राम सभा को होगा।
अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण करने या विस्थापितों के पुनर्वास से पहले ग्राम सभा से अनिवार्य रूप से राय-मशविरा और सहमति लेनी होगी। बिना ग्राम सभा की मर्जी के जमीन का हस्तांतरण नहीं हो सकेगा।
पेसा यह कानून आदिवासियों और स्थानीय ग्रामीणों की पारंपरिक रूढ़ियों, सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक संसाधनों और विवादों के निपटारे की पारंपरिक प्रणालियों को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। गांव में लगने वाले स्थानीय हाट-बाजारों का प्रबंधन अब ग्राम सभा करेगी।









