सोशल संवाद / जमशेदपुर : अब अपने लौहनगरी में अब कॉर्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा होगी। स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी कमेटी ने टीएमएच और एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को कॉर्निया ट्रांसप्लांट की मंजूरी दे दी है। वहीं, एमजीएम में आई बैंक की स्थापना का रास्ता भी साफ हो गया है।

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ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स (संशोधन) अधिनियम, 2011 के तहत गठित एडवाइजरी कमेटी ने राज्य के तीन अस्पतालों को पांच वर्षों के लिए कॉर्निया ट्रांसप्लांट और आई बैंक संचालन की अनुमति प्रदान की है। यह निर्णय स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित बैठक में लिया गया।
बैठक के दौरान समिति ने पांच अस्पतालों के तकनीकी और कानूनी मानकों की समीक्षा की। इसके बाद टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच), जमशेदपुर और आईरिस सुपर स्पेशियलिटी आई केयर सेंटर, रांची को कॉर्निया ट्रांसप्लांट की अनुमति दी गई। वहीं, एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमजीएमएमसीएच), जमशेदपुर को कॉर्निया ट्रांसप्लांट के साथ आई बैंक संचालन की भी स्वीकृति मिली है।
शहर में पहले थी कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधाः जमशेदपुर में लंबे समय से आई बैंक की मांग की जा रही थी। इसके लिए स्थान भी चिह्नित किया गया था, लेकिन आवश्यक अनुमति नहीं मिलने के कारण मरीजों को कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए कोलकाता या रांची जाना पड़ता था। उल्लेखनीय है कि जमशेदपुर आई बैंक में पहले कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन इसके बंद होने के बाद यह सेवा भी समाप्त हो गई। इसके बाद नेत्रदान से प्राप्त कॉर्निया को कोलकाता या रांची भेजा जाता रहा है।
राज्य स्तरीय टीम ने पांच केंद्रों का किया था निरीक्षण
जानकारी के अनुसार, हाल ही में राज्य स्तरीय टीम ने आई बैंक और कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं के लिए पांच अस्पतालों का निरीक्षण किया था। इनमें जमशेदपुर के एमजीएम और टीएमएच समेत राज्य के अन्य अस्पताल शामिल थे। स्वीकृति मिलने के बाद अब आवश्यक उपकरणों और संसाधनों की उपलब्धता की प्रक्रिया शुरू होगी।
एमजीएमः विकास कार्य की राशि खर्च करने पर चर्चा
एमजीएम के प्राचार्य ने मंगलवार को विभिन्न विभागों के अध्यक्षों के साथ बैठक की। बैठक में अनुरक्षण योजना के तहत सरकार द्वारा प्रत्येक विभाग को विकास कार्यों के लिए दी गई पांच-पांच लाख रुपये की राशि खर्च न किए जाने पर चर्चा हुई। प्राचार्य ने नेत्र रोग विभाग और त्वचा रोग विभाग की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की, क्योंकि दोनों विभाग राशि उपयोग करने में सबसे पीछे हैं।
बर्न विभाग में 1.3 करोड़ रुपये से बढ़ेंगी सुविधाएं
एमजीएम की बर्न यूनिट को मजबूत बनाने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.31 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से बर्न आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक सामग्री खरीदी जाएगी। खासतौर पर जले हुए घाव पर लगने वाली विशेष पट्टी ‘मेट्रीडर्म’ की खरीद भी इस मद में शामिल है। बर्न यूनिट को अलग विभाग का दर्जा देने की मांग की जा रही है, लेकिन अभी भी यह सर्जरी विभाग के अंतर्गत ही चल रहा है।










