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झारखंड में बंद पड़े चापाकल बनेंगे रिचार्ज पिट, बारिश के पानी से बढ़ेगा भूजल स्तर

By Riya Kumari

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झारखंड में बंद पड़े चापाकल बनेंगे रिचार्ज पिट, बारिश के पानी से बढ़ेगा भूजल स्तर

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सोशल संवाद / रांची : झारखंड में लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए राज्य सरकार एक नई पहल करने जा रही है। अब वर्षों से बंद पड़े और अनुपयोगी चापाकलों (हैंडपंप) को रिचार्ज पिट में बदला जाएगा, ताकि बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाकर भूजल स्तर को बेहतर बनाया जा सके। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

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क्या है सरकार की योजना?

योजना के तहत ऐसे चापाकलों की पहचान की जाएगी जो पिछले 25 से 30 वर्षों से उपयोग में नहीं हैं। इन हैंडपंपों के आसपास वैज्ञानिक तरीके से रिचार्ज पिट तैयार किए जाएंगे, जिससे वर्षा का पानी सीधे जमीन में समा सके और भूजल का प्राकृतिक पुनर्भरण (Groundwater Recharge) हो सके।

सभी प्रमंडलों से मांगी गई सूची

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने सभी प्रमंडलों से बंद और जर्जर चापाकलों की सूची मांगी है। इसके साथ ही उनकी भौगोलिक स्थिति की जानकारी भी जुटाई जा रही है, ताकि निर्माण कार्य के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी या कानूनी बाधा न आए। विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि ऐसे चापाकल निजी मकानों या चारदीवारी के भीतर न हों।

एक रिचार्ज पिट पर कितना आएगा खर्च?

प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, एक रिचार्ज पिट तैयार करने में लगभग 80 से 82 हजार रुपये का खर्च आएगा। इस परियोजना का उद्देश्य केवल पुराने चापाकलों का उपयोग करना नहीं, बल्कि वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देना और भविष्य में जल संकट को कम करना भी है।

क्यों जरूरी है यह योजना?

सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान भूजल दोहन में लगातार वृद्धि हुई है। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जबकि धनबाद, कोडरमा, रांची (शहरी) और कुछ अन्य इलाकों को ‘क्रिटिकल’ या ‘सेमी-क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में भूजल संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है।

रिचार्ज पिट कैसे करेगा काम?

रिचार्ज पिट वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) की एक प्रभावी तकनीक है। इसमें जमीन में गड्ढा बनाकर उसमें बड़े पत्थर, छोटे कंकड़ और मोटी रेत की परतें डाली जाती हैं। बारिश का पानी इन परतों से छनकर धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंचता है, जिससे भूजल स्तर में सुधार होता है और पानी का प्राकृतिक भंडारण बढ़ता है।

सरकार का क्या कहना है?

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि राज्य में तेजी से गिरते भूजल स्तर को देखते हुए बंद पड़े चापाकलों को रिचार्ज पिट में बदलने की योजना तैयार की गई है। सभी प्रमंडलों से आवश्यक जानकारी मांगी गई है और कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस दिशा में तेजी से काम शुरू किया जाएगा।

भविष्य के लिए अहम पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो न केवल बारिश के पानी का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में भूजल संकट को कम करने में भी बड़ी मदद मिलेगी। इससे पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के सतत प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।

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