सोशल संवाद / डेस्क : नेपाल में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, आपदा में कम से कम 165 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 826 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई इलाकों में हुआ है। अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने घरों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई बस्तियां पूरी तरह तबाह हो गई हैं और प्रभावित इलाकों का संपर्क भी टूट गया है।
भारतीयों को लेकर भी चिंता बढ़ी
नेपाल में लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल हैं। शुरुआती रिपोर्टों में 133 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। बाद की रिपोर्ट में नेपाल में लापता 826 लोगों में 177 भारतीय नागरिकों के शामिल होने की बात कही गई है। इनमें बड़ी संख्या में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु बताए जा रहे हैं।
भारत सरकार नेपाल के साथ लगातार संपर्क में है और राहत एवं बचाव कार्यों में सहायता पहुंचा रही है। भारतीय वायुसेना के जरिए राहत सामग्री भेजी गई है, जबकि भारतीय नागरिकों की तलाश और उनके परिजनों से समन्वय के लिए भी प्रयास जारी हैं।
ग्लेशियर टूटने से आई तबाही
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के विश्लेषण के अनुसार, यह आपदा सामान्य भूकंप के कारण नहीं बल्कि ग्लेशियल आइस-रॉक एवेलांच यानी बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के अचानक टूटकर गिरने से जुड़ी थी। इसके बाद भारी मात्रा में पानी और मलबा नदी में आया, जिसने नीचे के इलाकों में विनाशकारी बाढ़ पैदा कर दी।
फिलहाल नेपाल में सेना, पुलिस और अन्य राहत एजेंसियां हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कें और पुल राहत अभियान को मुश्किल बना रहे हैं।









