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दिल्ली के 92 कॉलोनियों और प्राचीन गांवों से O Zone हटाने की मांग, सांसद मनोज तिवारी और रामवीर बिधूड़ी ने उपराज्यपाल से की मुलाकात

By Riya Kumari

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दिल्ली के 92 कॉलोनियों और प्राचीन गांवों से O Zone हटाने की मांग, सांसद मनोज तिवारी और रामवीर बिधूड़ी ने उपराज्यपाल से की मुलाकात

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सोशल संवाद / नई दिल्ली: दिल्ली के दर्जनों प्राचीन गांवों और 92 नियमित कॉलोनियों को O Zone से बाहर करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा सांसद मनोज तिवारी और रामवीर सिंह बिधूड़ी ने दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधु से मुलाकात कर प्रभावित लोगों की चिंताओं से अवगत कराया। सांसदों का कहना है कि इस निर्णय से करीब 15 लाख लोगों का भविष्य और संपत्ति अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

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15 लाख लोगों की चिंता का मुद्दा

उपराज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में सांसदों ने कहा कि इन गांवों और कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोग वर्षों से अनिश्चितता की स्थिति में जी रहे हैं। O Zone के कारण निर्माण, विकास कार्यों और संपत्तियों से जुड़े कई मामलों में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

2008 में हो चुका था नियमितीकरण

सांसदों ने बताया कि संबंधित गांवों और कॉलोनियों को 24 मार्च 2008 को नियमित किया गया था। उस समय ये क्षेत्र F Zone के अंतर्गत आते थे। लेकिन 10 अगस्त 2010 को इन्हें यमुना के O Zone में शामिल कर दिया गया, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ।

DDA ने जारी किया था ड्राफ्ट नोटिफिकेशन

ज्ञापन के अनुसार, स्थानीय लोगों के विरोध के बाद 28 सितंबर 2013 को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने इन क्षेत्रों को O Zone से हटाने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया था। हालांकि, एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) की याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।

NGT में मामला खत्म, फिर भी लंबित है फैसला

सांसदों ने उपराज्यपाल को बताया कि संबंधित याचिका का निपटारा वर्ष 2015 में ही हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद O Zone हटाने का फैसला अब तक लंबित है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व उपराज्यपाल और DDA के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी माना था कि इन गांवों की भूमि का उपयोग आवासीय श्रेणी में ही आता है।

कॉलोनियां यमुना से काफी दूर

भाजपा सांसदों ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट और केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति की राय के अनुसार ये कॉलोनियां यमुना नदी से काफी दूरी पर स्थित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों से नदी के प्रवाह या जल गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

जल्द राहत देने की मांग

मनोज तिवारी और रामवीर सिंह बिधूड़ी ने उपराज्यपाल से अनुरोध किया कि 28 सितंबर 2013 के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अंतिम रूप देकर इन कॉलोनियों और गांवों को O Zone से बाहर किया जाए। उनका कहना है कि इससे लाखों निवासियों को राहत मिलेगी और विकास कार्यों में आ रही बाधाएं भी दूर होंगी।

लोगों की निगाहें प्रशासनिक फैसले पर

अब प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की नजरें उपराज्यपाल और संबंधित एजेंसियों के फैसले पर टिकी हुई हैं। यदि O Zone हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो इससे दिल्ली के हजारों परिवारों को लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता से राहत मिल सकती है।

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