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‘प्रोजेक्ट परिवर्तन- हुनर से पहचान’ के तहत चाईबासा मंडल कारा में डिजिटल साक्षरता अभियान शुरू, बंदियों को तकनीकी प्रशिक्षण

By Riya Kumari

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‘प्रोजेक्ट परिवर्तन- हुनर से पहचान’ के तहत चाईबासा मंडल कारा में डिजिटल साक्षरता अभियान शुरू, बंदियों को तकनीकी प्रशिक्षण

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सोशल संवाद / चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की पहल “प्रोजेक्ट परिवर्तन हुनर से पहचान” के तहत मंडल कारा, चाईबासा में बंदियों के कौशल विकास और सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डिजिटल साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के प्रथम चरण में 10 बंदियों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रशिक्षण शुरू किया गया है।

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इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, डिजिटल ज्ञान प्रदान करना और रिहाई के बाद उन्हें आत्मनिर्भर जीवन के लिए तैयार करना है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कंप्यूटर और मोबाइल के आधारभूत संचालन, डिजिटल उपकरणों के सुरक्षित उपयोग तथा दैनिक जीवन में तकनीक की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की दी जानकारी

कार्यक्रम में बंदियों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग, ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लाभों के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए उन्हें साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं से भी अवगत कराया गया।

प्रशिक्षकों ने बताया कि फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक, ओटीपी साझा करने और भ्रामक संदेशों के जरिए होने वाली ऑनलाइन धोखाधड़ी से कैसे बचा जा सकता है। बंदियों को डिजिटल दुनिया में सतर्क रहने और सुरक्षित व्यवहार अपनाने की सलाह दी गई।

डिजिटल युग में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि वर्तमान समय डिजिटल क्रांति का दौर है और समाज के प्रत्येक वर्ग तक तकनीक की पहुंच सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कारा में निरुद्ध व्यक्तियों को केवल सुधारात्मक वातावरण देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्षरता बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, नई संभावनाओं से परिचित कराने और रिहाई के बाद बेहतर जीवन जीने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जिला प्रशासन बंदियों के पुनर्वास और कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए लगातार सकारात्मक पहल कर रहा है।

हर रविवार होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी अपर्णा कुमारी ने कहा कि डिजिटल साक्षरता आज की मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को डिजिटल सेवाओं का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सिखाया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में तकनीक का बेहतर लाभ उठा सकें।

जिला प्रशासन के अनुसार यह डिजिटल साक्षरता जागरूकता कार्यक्रम प्रत्येक रविवार को नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से मंडल कारा के सभी बंदियों को प्रशिक्षण देकर डिजिटल रूप से सशक्त बनाया जाएगा, जिससे वे कंप्यूटर, मोबाइल और इंटरनेट का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग सीख सकें।

यह पहल बंदियों के पुनर्वास, कौशल विकास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम मानी जा रही है।

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