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Doom Scrolling Side Effects: लगातार मोबाइल स्क्रॉलिंग बना रही युवाओं को तनावग्रस्त, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

By Riya Kumari

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Doom Scrolling Side Effects: लगातार मोबाइल स्क्रॉलिंग बना रही युवाओं को तनावग्रस्त, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

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सोशल संवाद / डेस्क : आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया युवाओं की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन घंटों तक लगातार नकारात्मक खबरें, वीडियो और पोस्ट देखना मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। हाल ही में सामने आई एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि “डूम स्क्रॉलिंग” यानी लगातार तनावपूर्ण और नकारात्मक कंटेंट स्क्रॉल करने की आदत युवाओं में स्ट्रेस, एंग्जायटी और नेगेटिव सोच को बढ़ा रही है।

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क्या है Doom Scrolling?

डूम स्क्रॉलिंग वह स्थिति है, जब लोग सोशल मीडिया या न्यूज़ प्लेटफॉर्म पर लगातार नकारात्मक खबरें, विवाद, हादसे या तनाव बढ़ाने वाले कंटेंट देखते रहते हैं। कई बार लोग बिना जरूरत घंटों तक मोबाइल स्क्रीन पर स्क्रॉल करते रहते हैं, जिससे दिमाग पर मानसिक दबाव बढ़ने लगता है।

युवाओं में बढ़ रही मानसिक परेशानी

स्टडी के अनुसार, जो युवा देर रात तक सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं और लगातार नकारात्मक कंटेंट देखते हैं, उनमें तनाव, चिंता, अकेलापन और डिप्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत धीरे-धीरे मानसिक शांति को प्रभावित करती है और व्यक्ति को अधिक चिड़चिड़ा बना सकती है।

नींद और फोकस पर भी पड़ रहा असर

लगातार मोबाइल स्क्रॉलिंग की वजह से युवाओं की नींद प्रभावित हो रही है। देर रात तक फोन इस्तेमाल करने से नींद पूरी नहीं हो पाती, जिसका असर पढ़ाई, काम और रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखने लगता है। इसके अलावा लगातार स्क्रीन देखने से फोकस और प्रोडक्टिविटी भी कम हो सकती है।

एक्सपर्ट्स ने दी ये सलाह

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का सीमित और संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। रोजाना कुछ समय मोबाइल और इंटरनेट से दूरी बनाकर रखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा योग, एक्सरसाइज, किताब पढ़ना और परिवार के साथ समय बिताना तनाव कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

कैसे बचें Doom Scrolling की आदत से?

  • सोशल मीडिया इस्तेमाल का समय तय करें
  • सोने से पहले मोबाइल इस्तेमाल कम करें
  • पॉजिटिव और ज्ञानवर्धक कंटेंट देखें
  • डिजिटल डिटॉक्स की आदत अपनाएं
  • जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक का सही उपयोग जीवन को आसान बना सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा डिजिटल दुनिया में डूबना मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।

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