सोशल संवाद / नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी में मंथन शुरू हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार और संगठन के अध्यक्ष विनोद जाखड़ के साथ बैठक कर चुनावी नतीजों की समीक्षा की।
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इस बार NSUI DUSU के चारों सेंट्रल पैनल पदों में से एक भी सीट नहीं जीत सकी। 2015 के बाद यह पहली बार है जब NSUI का DUSU के सेंट्रल पैनल में कोई प्रतिनिधि नहीं होगा।
DUSU चुनाव में क्या रहा नतीजा?
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में ABVP ने चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की। वहीं उपाध्यक्ष पद पर NSUI से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने वाले दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। इस नतीजे के बाद NSUI के संगठन, उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति को लेकर पार्टी के भीतर समीक्षा शुरू हुई है।
राहुल गांधी ने कन्हैया कुमार और विनोद जाखड़ से की चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, बैठक में DUSU चुनाव के नतीजों और NSUI के प्रदर्शन पर विस्तार से चर्चा हुई। राहुल गांधी ने संगठन के पदाधिकारियों से हार के कारणों और चुनावी रणनीति को लेकर जानकारी ली। बैठक में छात्रों के मुद्दों को विश्वविद्यालय और कैंपस स्तर तक मजबूती से उठाने तथा संगठन की जमीनी मौजूदगी बढ़ाने पर भी चर्चा होने की रिपोर्ट है।
उम्मीदवार चयन भी बना चर्चा का मुद्दा
DUSU चुनाव के बाद NSUI के उम्मीदवार चयन को लेकर भी सवाल उठे हैं। खास तौर पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत ने टिकट वितरण के फैसले को चर्चा में ला दिया।
शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की, जबकि NSUI इस पद पर अपना उम्मीदवार जिताने में सफल नहीं रही। कुछ रिपोर्ट्स में टिकट वितरण और संगठन के भीतर मतभेदों को चुनावी प्रदर्शन से जोड़कर देखा गया है। हालांकि इन कारणों की राजनीतिक व्याख्या अलग-अलग हो सकती है।
NSUI के लिए क्यों अहम है DUSU चुनाव?
DUSU देश के प्रमुख छात्र संघ चुनावों में शामिल है और दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। इस बार NSUI का सेंट्रल पैनल में खाता नहीं खुलना संगठन के लिए समीक्षा का विषय बना है। राहुल गांधी की बैठक ऐसे समय हुई है जब कांग्रेस छात्र और युवा वर्ग के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने पर जोर दे रही है। पार्टी की ओर से छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर अलग-अलग स्तर पर अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
अब NSUI के सामने क्या चुनौती?
DUSU नतीजों के बाद NSUI के सामने संगठन को कैंपस स्तर पर मजबूत करने, छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहने और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया को लेकर सवालों का जवाब देने की चुनौती है। बैठक के बाद संगठन की रणनीति में क्या बदलाव किए जाते हैं, इस पर अब नजर रहेगी।











