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लोकायुक्त तक पहुँचा शिक्षा विभाग का मामला, सूचना नहीं मिलने पर राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील

By Riya Kumari

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लोकायुक्त तक पहुँचा शिक्षा विभाग का मामला, सूचना नहीं मिलने पर राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील
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सोशल संवाद / चक्रधरपुर :  पश्चिमी सिंहभूम जिले की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न जनहित के मामलों को लेकर अब लड़ाई दो महत्वपूर्ण वैधानिक मंचों झारखंड लोकायुक्त एवं झारखंड राज्य सूचना आयोग तक पहुँच गई है। एक ओर निजी विद्यालयों में कथित अनियमित शुल्क वसूली, “प्रमोशन फीस”, जिला प्रशासन के निर्देशों के अनुपालन तथा प्रशासनिक जवाबदेही से संबंधित मामला झारखंड लोकायुक्त के समक्ष परिवाद संख्या 01/लोक(शिक्षा)02/2026 के रूप में दर्ज है, वहीं दूसरी ओर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई सूचनाएँ समय पर एवं पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की जा चुकी है।

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मानवाधिकार कार्यकर्ता बैरम खान एवं पत्रकार तारीक सुल्तान पिछले कई महीनों से अलग-अलग माध्यमों से शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों में दस्तावेज़ी साक्ष्य एकत्रित करने का कार्य कर रहे हैं। दोनों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं कानून के पालन को सुनिश्चित करना है।

बैरम खान द्वारा निजी विद्यालयों में कथित “प्रमोशन फीस”, अन्य शुल्कों की वसूली, जिला प्रशासन के निर्देशों के अनुपालन तथा अभिभावकों की शिकायतों को लेकर विभिन्न स्तरों पर शिकायतें दर्ज कराई गईं। इस मामले में पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त से मुलाकात कर स्वतंत्र जांच की मांग की गई तथा बाद में झारखंड लोकायुक्त के समक्ष भी परिवाद दायर किया गया, जिसे लोकायुक्त कार्यालय द्वारा विधिवत पंजीकृत किया जा चुका है।

दूसरी ओर पत्रकार तारीक सुल्तान द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत शिक्षा विभाग से निजी विद्यालयों के विरुद्ध की गई कार्रवाई, निरीक्षण रिपोर्ट, शिकायत निवारण, सेवानिवृत्त शिक्षकों के सेवा-निवृत्ति लाभों में हुई देरी, लंबित मामलों तथा विभागीय कार्रवाई से संबंधित विस्तृत सूचनाएँ मांगी गईं।

हालाँकि, विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए उत्तरों में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अभिलेखीय सूचनाएँ उपलब्ध नहीं कराई गईं। विशेष रूप से निजी विद्यालयों के विरुद्ध की गई कार्रवाई एवं शिकायतों पर हुई कार्रवाई से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के स्थान पर सामान्य उत्तर देकर आवेदन का निस्तारण किया गया। नियमानुसार प्रथम अपील दायर किए जाने के बावजूद संतोषजनक सूचना प्राप्त नहीं होने पर मामला अब झारखंड राज्य सूचना आयोग के समक्ष विचाराधीन है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा विभाग से संबंधित मामलों में यदि सभी अभिलेख एवं सूचनाएँ पारदर्शी तरीके से उपलब्ध करा दी जाएँ तो वास्तविक स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी। उनका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन हो, निजी विद्यालयों में नियमों के अनुरूप कार्य हो तथा सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं अभिभावकों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनी रहे।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सूचना का अधिकार, जवाबदेही और पारदर्शिता सुशासन की आधारशिला हैं। यदि सार्वजनिक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं, तो नागरिकों का वैधानिक मंचों का दरवाजा खटखटाना उनका संवैधानिक अधिकार है। इसी भावना के साथ यह पूरा अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है।

जनता से अपील

मानवाधिकार कार्यकर्ता बैरम खान ने पश्चिमी सिंहभूम सहित पूरे झारखंड के अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं जागरूक नागरिकों से अपील की है कि यदि शिक्षा व्यवस्था से संबंधित किसी भी प्रकार की अनियमितता, अवैध वसूली, पद के दुरुपयोग, प्रशासनिक लापरवाही अथवा अन्य जनहित से जुड़े मामलों के संबंध में उनके पास कोई तथ्य, दस्तावेज़, अभिलेख, ऑडियो, वीडियो अथवा अन्य साक्ष्य उपलब्ध हों, तो उन्हें उपलब्ध कराएँ।

उन्होंने कहा कि प्राप्त सभी तथ्यों एवं साक्ष्यों का विधिसम्मत परीक्षण कर उन्हें संबंधित सक्षम प्राधिकारियों, जैसे लोकायुक्त, राज्य सूचना आयोग, सतर्कता विभाग, शिक्षा विभाग अथवा अन्य वैधानिक मंचों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके तथा दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो और पीड़ित लोगों को न्याय मिल सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष या संस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी एवं जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज का सहयोग और जनभागीदारी ही इस अभियान की सबसे बड़ी शक्ति है ।

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