जलापूर्ति और स्वच्छता पर बल दे झारखंड, 4200 करोड़ मिलेंगे

By Tamishree Mukherjee

Published :

Follow
Jharkhand to focus on water supply and sanitation; to receive ₹4,200 crore

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / रांची : केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने झारखंड सरकार को सलाह दी है कि 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि का उपयोग ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के संचालन और स्थानीय संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने में किया जाए। विभाग ने स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों में ग्राम पंचायतों की भूमिका पर भी बल देने को कहा है। झारखंड को 16वें वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदान में से करीब 4,200 करोड़ रुपये जलापूर्ति और स्वच्छता पर खर्च होने हैं।

यह भी पढ़े : तकनीकी अड़चन से अटकी जिले के 12 हजार पेंशनधारियों की राशि

दरअसल, बीते एक और दो सितंबर को मंत्रालय ने सभी राज्यों के साथ वर्चुअल बैठक की थी। इसका मुख्य उद्देश्य जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 और 16वें वित्त आयोग के बीच समन्वय मजबूत करना था, ताकि जलस्रोतों की स्थिरता, जल सुरक्षा और ग्राम पंचायत के नेतृत्व में टिकाऊ ग्रामीण पेयजल सेवा वितरण की योजना को बढ़ावा दिया जा सके।

16वें वित्त आयोग से जलापूर्ति और स्वच्छता को मिलेंगे 4200 करोड़ः वित्त विभाग के अनुसार, 16वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2026-31 की अवधि में झारखंड को 14,231 करोड़ रुपये का अनुदान मिलने का अनुमान है। यह राशि टाइड और अन-टाइड श्रेणी में बंटी होगी। टाइड राशि का उपयोग जल जीवन मिशन और स्वच्छता पर किया जाना है। इसका

करीब 60 प्रतिशत, यानी 4,200 करोड़ रुपये से अधिक, सीधे जेजेएम के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने और स्वच्छता अभियानों को गति देने में लगाया जाएगा।

ग्राम पंचायत की भूमिका पर केंद्र सरकार का जोर

केंद्रीय मंत्रालय ने ग्रामीण जल प्रशासन में ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया है। कहा है कि ग्राम पंचायत को व्यापक वार्षिक संचालन एवं रखरखाव योजना तैयार करने, स्थानीय संसाधन जुटाने, सेवा वितरण का प्रबंधन करने तथा अन्य कार्यक्रमों के तहत बनी जलापूर्ति अवसंरचना की जवाबदेही सुनिश्चित करने में नेतृत्व करना चाहिए।

गांवों में स्वच्छता सेवाओं को टिकाऊ बनाने का अवसर

केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग के ढांचे का हवाला देते हुए कहा है कि ये अनुदान गांवों में पेयजल और स्वच्छता सेवाओं को टिकाऊ बनाने का महत्वपूर्ण अवसर है। आयोग द्वारा अनुशंसित ग्रामीण स्थानीय निकाय अनुदानों का बड़ा हिस्सा जल और स्वच्छता कार्यों के लिए तय है। इस राशि का उपयोग मुख्यतः संचालन-रख रखाव, स्रोतों की स्थिरता, जल गुणवत्ता प्रबंधन, सेवा सुधार और स्थानीय संस्थागत क्षमता मजबूत करने में हो। जहां मौजूदा संपत्तियों को देखरेख की जरूरत है, वहां नए निर्माण पर खर्च न किया जाए।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

संबंधित पोस्ट

Exit mobile version