सोशल संवाद/घाटशिला: सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला के स्वामी विवेकानंद सभागार में सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ को लेकर प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को नवाचार, सामाजिक सेवा और रचनात्मक सोच के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों के लिए कुल ₹2 करोड़ के पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। इच्छुक प्रतिभागी 30 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं।
सामाजिक समस्याओं के समाधान पर जोर
कार्यक्रम में कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने युवाओं से अपनी प्रतिभा का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास के लिए करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और देश की प्रगति में योगदान देना भी है। युवाओं को सेवा भावना, रचनात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम में एमआरपीएल-ओएनजीसी के स्वतंत्र निदेशक लखन मरांडी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी भी उपस्थित रहे।
सेवा की भावना से नवाचार को जोड़ें युवा: लखन मरांडी
लखन मरांडी ने कहा कि ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ युवाओं को नए विचारों के माध्यम से सामाजिक समस्याओं का समाधान खोजने का अवसर देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतियोगिता में सक्रिय भागीदारी करने और ऐसे प्रोजेक्ट तैयार करने की अपील की, जो आम लोगों के जीवन को आसान और बेहतर बना सकें।
उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में कृषि, जल एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार तथा पर्यावरण एवं सतत विकास जैसे क्षेत्रों में नए विचार प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका: डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी
डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की प्रतिभा, मेहनत, वैज्ञानिक सोच और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, रोजगार के अवसरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से स्थानीय समस्याओं की पहचान कर छोटे-छोटे प्रयोगों और सामुदायिक सेवा के माध्यम से समाधान विकसित करने की अपील की।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रचनात्मक सोच पर जोर
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने विद्यार्थियों को नवाचार, अनुसंधान और रचनात्मक चिंतन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक सेवा और समस्या समाधान से भी जोड़ना जरूरी है।
वहीं, कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं का निरंतर विकास करना चाहिए और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की दिशा में योगदान देना चाहिए।
₹2 करोड़ के पुरस्कार, 30 अक्टूबर तक भाग लेने का अवसर
‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026’ का उद्देश्य युवाओं के नए विचारों को व्यावहारिक रूप देना और समाजोपयोगी समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रतियोगिता में कॉलेज के विद्यार्थी, व्यक्तिगत प्रतिभागी और विभिन्न टीमें हिस्सा ले सकती हैं।
प्रतिभागी निम्नलिखित क्षेत्रों में अपने नवाचारी विचार प्रस्तुत कर सकते हैं:
- कृषि और ग्रामीण विकास
- जल एवं स्वच्छता
- स्वास्थ्य एवं कल्याण
- शिक्षा
- प्रौद्योगिकी एवं नवाचार
- पर्यावरण एवं सतत विकास
प्रतियोगिता के लिए कुल ₹2 करोड़ के पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। इच्छुक प्रतिभागियों से 30 अक्टूबर तक आवेदन करने की अपील की गई है।
कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय की सहायक कुलसचिव अर्चना सिंह ने किया। इसमें विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।











