सोशल संवाद / रांची : हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में रखी गई बांग्लादेशी महिला से दुष्कर्म मामले में तीन सिपाहियों पर एफआईआर दर्ज कर तीनों को निलंबित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने सोमवार को हाईकोर्ट को यह जानकारी दी। कोर्ट में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की ओर से पेश सीलबंद रिपोर्ट में भी महिला से तीन पुलिसकर्मियों द्वारा दुष्कर्म का उल्लेख है।
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मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी। अदालत ने प्रार्थी से राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर प्रत्युत्तर मांगा है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि महिला को बांग्लादेश भेजने के लिए वर्ष 2023 से ही विदेश मंत्रालय को पत्राचार किया जा रहा है। हालांकि, अब तक जवाब नहीं मिला है। इस पर अदालत ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से जवाब दाखिल करने को कहा। बता दें कि
हाईकोर्ट में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने रिट याचिका में बताया कि लोहसिंघना थाने से संबंधित मामले में महिला कोर्ट से बरी होने के बावजूद महिला डिटेंशन सेंटर में पड़ी है। वहीं मामले की सुनवाई के दौरान महिला ने डिटेंशन सेंटर में वर्ष 2020 से 2022 के बीच उससे दुष्कर्म किए जाने की बात कही थी।
हाईकोर्ट ने जवाब मांगा- महिला को बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा
सुनवाई के दौरान अदालत ने महिला को लंबे समय तक हिरासत में रखने पर सवाल उठाए। अदालत ने मौखिक रूप से पूछा कि यदि महिला को वर्ष 2021 में विदेशी अधिनियम के मामले में तीन साल की सजा हुई थी तो सजा पूरी होने के बाद उसे बांग्लादेश क्यों नहीं भेजा गया? डिटेंशन सेंटर में रखने की जरूरत क्यों पड़ी। अदालत ने यह भी सवाल किया कि वर्ष 2025 में महिला के खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत दोबारा मामला दर्ज किया गया, जबकि वर्ष 2026 में वह उस मामले में बरी हो चुकी है। बरी करने के आदेश के खिलाफ सरकार ने अपील क्यों नहीं की?











