सोशल संवाद / रांची : राज्य सरकार एयर एंबुलेंस की तर्ज पर हेलीकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विस (एचईएमएस) शुरू करने जा रही है। अभी सरकारी एयर एंबुलेंस की सुविधा केवल रांची से है, लेकिन गंभीर मरीजों को राज्य के दूरस्थ इलाकों से रांची लाने में दिक्कत होती है। इसी को देखते हुए सरकार ने सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर आधारित इमरजेंसी मेडिकल सेवा शुरू करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नागर विमानन प्रभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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प्रस्ताव पहले से तैयार था, लेकिन हाल के एयर एंबुलेंस हादसे के बाद इसे तेजी से लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार न्यूनतम उड़ान गारंटी के आधार पर इस सेवा पर लगभग 79 लाख रु. प्रतिमाह खर्च करेगी। बाजार दर के अनुसार सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर की सेवा करीब 2.25 लाख रुपए (जीएसटी अतिरिक्त) प्रति घंटा है। 35 घंटे प्रतिमाह की न्यूनतम उड़ान के आधार पर यह खर्च अनुमानित है। अंतिम दर का निर्धारण निविदा प्रक्रिया के बाद एल-वन दर के आधार पर होगा।
हेलीकॉप्टर एंबुलेंस की क्यों पड़ी जरूरत
नागर विमानन के अनुसार, वर्तमान एयर एंबुलेंस सेवा केवल स्थापित हवाई अड्डों से ही संचालित हो सकती है। राज्य के कई ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में हवाई पट्टी नहीं है। ऐसे में गंभीर मरीजों को पहले सड़क मार्ग से नजदीकी एयरपोर्ट लाना पड़ता है, जिससे समय नष्ट होता है और कई बार जान का खतरा बढ़ जाता है। नई हेलीकॉप्टर सेवा सीधे नजदीकी सुरक्षित स्थल पर लैंड कर मरीज को उठाएगी, जिससे समय की बचत होगी।
जानिए… मरीज कैसे ले सकते हैं यह सुविधा
ग्रामीण क्षेत्रः मरीज की अति गंभीरता की स्थिति में 108 एम्बुलेंस सर्विस पर हेलिकॉप्टर की सेवा के लिए कॉल करना होगा। इसके लिए जिला स्तर पर सिविल सर्जन, प्रखंड स्तर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी व पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव नोडल पदाधिकारी होंगे। संबंधित नोडल पदाधिकारी मरीज के निकटस्थ हेलीकॉप्टर लैंडिंग स्थल के कॉर्डिनेट्स के साथ खंड स्तरीय नोडल पदाधिकारी को सूचित करेंगे। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी मरीज की चिकित्सीय स्थिति की जानकारी प्राप्त कर एचईएमएस की सेवा उपलब्ध कराने के लिए सिविल सर्जन को अनुशंसा करेंगे।
शहरी क्षेत्रः शहरी क्षेत्रों में गंभीर मरीज को एक जिला से दूसरे जिला या रांची रेफर करना हो, तो संबंधित सरकारी अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन को हेलीकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सेवा की आवश्यकता संबंधी अधियाचना भेजेंगे। इसके बाद सिविल सर्जन नागर विमानन प्रभाग को अस्पताल के निकटस्थ हेलिकॉप्टर लैंडिंग स्थल के कॉर्डिनेट्स के साथ अनुरोध भेजेंगे। हालांकि, इस सेवा के विधिवत संचालन से पहले विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार किए जाने की भी तैयारी चल रही है, ताकि आपात स्थिति में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।









