सोशल संवाद/डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया।
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अपने भाषण में उन्होंने नक्सलवाद का जिक्र करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया और इसे देश के लिए एक नई चुनौती बताया।
जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों पर PM मोदी का बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जंगलों में हथियार उठाकर हिंसा का रास्ता अपनाने वाले नक्सलियों के खिलाफ देश ने बड़ी सफलता हासिल की है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब एक और तरह की चुनौती मौजूद है, जिसे उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ बताया।
PM मोदी के मुताबिक, ऐसे लोग सत्ता और व्यवस्था के गलियारों में मौजूद रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग करना जरूरी है, ताकि देश के युवाओं को एकजुट करके विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
‘लाल आतंक ने कई हिस्सों को बंदूक के दम पर बंधक बनाया’
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय देश के कई हिस्से ‘लाल आतंक’ की चपेट में थे और बंदूक के दम पर लोगों को डराया जाता था।
उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों का भी जिक्र किया। PM मोदी ने कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग अभियानों में 3,500 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई।
युद्ध से भी ज्यादा जवानों की जान गई- PM मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में हजारों सुरक्षाकर्मियों का बलिदान हुआ। उन्होंने इस संख्या की तुलना युद्ध में होने वाली मौतों से करते हुए कहा कि लोगों की रक्षा करते हुए 3,500 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की जान जाना बेहद बड़ी कीमत है।
PM मोदी ने कहा कि आजादी के 80 साल पूरे होने के बावजूद देश को लंबे समय तक नक्सलवाद जैसी चुनौती का सामना करना पड़ा। उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर हिंसा और ऐसी विचारधाराओं के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया।









