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Jammu Kashmir CISF Firing: कठुआ में 4 CISF जवानों की मौत, 2019 की घटना की फिर चर्चा

By Tamishree Mukherjee

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Jammu Kashmir CISF Firing
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सोशल संवाद / डेस्क : कठुआ जिले के बसोहली इलाके में सीआईएसएफ कैंप में हुई फायरिंग की घटना में चार जवानों की मौत के बाद सुरक्षा बलों के कैंपों में साथी जवानों पर फायरिंग की पुरानी घटनाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। 29 सितंबर 2026 को बसोहली के माश्का इलाके में स्थित सेवा हाइडल पावर प्रोजेक्ट में एक सीआईएसएफ हेड कांस्टेबल ने कथित तौर पर अपने साथियों पर फायरिंग कर दी। इस घटना में असिस्टेंट कमांडेंट, सब-इंस्पेक्टर और दो कांस्टेबलों की मौत हुई। आरोपी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

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कठुआ में क्या हुआ?

घटना मंगलवार शाम करीब 6:40 बजे सेवा हाइडल-2 पावर प्रोजेक्ट में हुई। यहां तैनात सीआईएसएफ हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार सिंह ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल से कैंप के एक कार्यालय में फायरिंग की।

मृतकों की पहचान असिस्टेंट कमांडेंट और कंपनी कमांडर अंकित कुमार पांडेय, सब-इंस्पेक्टर लक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल संजीव कुमार और कांस्टेबल मोहम्मद रफीक के रूप में हुई है। घटना के बाद आरोपी को पकड़ लिया गया और मामले की जांच शुरू कर दी गई।

सेवा हाइडल पावर प्रोजेक्ट कठुआ के बसोहली और हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की सीमा के बीच स्थित है। घटनास्थल तक सड़क मार्ग से पहुंचने के लिए हिमाचल प्रदेश के रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है।

बच्चे को ड्यूटी साइट पर लाने को लेकर विवाद की बात

बाद की रिपोर्टों के मुताबिक, घटना से पहले अवधेश कुमार सिंह और अधिकारियों के बीच बच्चे को ड्यूटी स्थल पर लाने को लेकर विवाद हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार अवधेश और उनकी पत्नी दोनों सीआईएसएफ में तैनात हैं और अलग-अलग शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं। इसी वजह से बच्चे को लेकर ड्यूटी स्थल पर आने-जाने की स्थिति बनती थी।

अधिकारियों ने कथित तौर पर बच्चे को प्रोजेक्ट परिसर में नहीं लाने के निर्देश दिए थे। घटना वाले दिन भी बच्चे को साइट पर लाए जाने को लेकर शिकायत और बहस हुई। इसके बाद विवाद बढ़ने की बात सामने आई है। हालांकि, घटना के पूरे क्रम और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है।

2019 की उधमपुर घटना की आई याद

कठुआ की घटना के बाद 21 मार्च 2019 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर स्थित बट्टल बलियां सीआरपीएफ कैंप में हुई फायरिंग की घटना की भी चर्चा हो रही है। उस घटना में एक कांस्टेबल ने अपने तीन साथियों पर गोली चला दी थी। तीन जवानों की मौत हुई थी और आरोपी ने बाद में खुद को भी गोली मार ली थी।

इन घटनाओं की परिस्थितियां अलग-अलग रही हैं, इसलिए इन्हें एक ही कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा। हालांकि, सुरक्षा बलों के कैंपों में साथी कर्मियों के बीच हुई फायरिंग की घटनाओं के कारण ड्यूटी के दौरान तनाव, विवाद और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं

पिछले वर्षों में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के कैंपों में साथी जवानों पर फायरिंग की कई घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। इनमें अलग-अलग मामलों में बीएसएफ, सेना, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और पुलिसकर्मी शामिल रहे हैं।

  • 2017: बांदीपोरा के बीएसएफ कैंप में एक जवान की साथी जवान की गोली लगने से मौत हुई थी।
  • 2018: भद्रवाह के सेना कैंप में कहासुनी के बाद एक जवान को गोली मारे जाने की घटना सामने आई थी।
  • 2019: श्रीनगर के पंथा चौक स्थित सीआरपीएफ कैंप में फायरिंग की घटना में दो जवान घायल हुए थे।
  • 2019: उधमपुर के बट्टल बलियां सीआरपीएफ कैंप में फायरिंग में तीन जवानों की मौत हुई थी।
  • 2020: उधमपुर के सूई इलाके में सीआईएसएफ कैंप में फायरिंग की घटना में एक जवान की मौत हुई थी।
  • 2022: रामबन के बगलिहार इलाके में सीआईएसएफ कैंप में फायरिंग की घटना में एक जवान घायल हुआ था।
  • 2024: उधमपुर के रेहंबल में पुलिसकर्मी द्वारा साथी पर फायरिंग की घटना सामने आई थी।
  • 2026: कठुआ के बसोहली में सेवा हाइडल प्रोजेक्ट पर फायरिंग में चार सीआईएसएफ कर्मियों की मौत हुई।

घटना के बाद CISF में मानसिक स्वास्थ्य पर भी फोकस

कठुआ की घटना के बाद सीआईएसएफ ने हाई-प्रेशर और संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के लिए मनोवैज्ञानिक आकलन और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ संवेदनशील पदों पर तैनात कर्मियों का विशेष साइकोमेट्रिक असेसमेंट किया जाएगा और साथियों में तनाव या व्यवहार में बदलाव के संकेत पहचानने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

मामले की जांच जारी

कठुआ फायरिंग मामले में आरोपी हेड कांस्टेबल पुलिस की हिरासत में है। घटना के कारणों और उससे पहले हुई घटनाओं की जांच की जा रही है। सीआईएसएफ की ओर से भी मामले की आंतरिक जांच की जा रही है। इसलिए विवाद की वजह और घटनाक्रम से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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