सोशल संवाद / जमशेदपुर : Jamshedpur में नोटिफाइड एरिया कमेटी (JNAC) द्वारा सैरात कानून के तहत दुकानों का किराया बढ़ाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। शहर के सामाजिक कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे करीब 7,700 से अधिक दुकानदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
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जेएनएसी के अधिकार पर उठाए सवाल
जवाहरलाल शर्मा का कहना है कि संविधान संशोधन के बाद जेएनएसी का अस्तित्व समाप्त माना जाता है और इसकी जगह जनता द्वारा चुनी गई संस्था, यानी नगर निगम को प्रशासनिक अधिकार मिलने चाहिए। ऐसे में सैरात से जुड़े किसी भी फैसले का अधिकार केवल नगर निगम को होना चाहिए, न कि जेएनएसी को।
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा मामला
उन्होंने बताया कि इंडस्ट्रियल टाउन बनाम नगर निगम से जुड़ा मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। गौरतलब है कि वर्ष 1989 में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने जमशेदपुर में नगर निगम के गठन का फैसला भी दिया था और इसकी अधिसूचना जारी हो चुकी थी।
हालांकि आरोप है कि टाटा कंपनी और राज्य सरकारों की मिलीभगत के कारण अब तक जमशेदपुर में नगर निगम का गठन नहीं हो सका, जिससे शहर के लाखों लोग स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान के अधिकार से वंचित हैं।
जनता के अधिकारों का मुद्दा
शर्मा ने कहा कि हाल ही में मानगो और जुगसलाई में संविधान के तहत नगर निकाय चुनाव कराए गए, जहां जनता ने अपने प्रतिनिधि और मेयर का चुनाव किया। लेकिन जमशेदपुर के लोगों को अब तक इस अधिकार से वंचित रखा गया है।
दुकानदारों से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने की अपील
उन्होंने शहर के दुकानदारों और उनके प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे सुप्रीम कोर्ट में चल रहे जनहित याचिका (PIL) मामले में इंटरवीनर के रूप में शामिल होकर अपनी समस्याओं को अदालत के सामने रखें।
जवाहरलाल शर्मा के अनुसार, पिछले लगभग 40 वर्षों से जमशेदपुर में नगर निगम गठन और जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी है। उनका कहना है कि यदि व्यापारी और आम लोग इस कानूनी लड़ाई में शामिल होंगे, तो मामले को और मजबूती मिल सकती है।
जेएनएसी द्वारा किराया बढ़ाने के फैसले ने शहर में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि दुकानदार और प्रशासन इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाते हैं और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले का क्या परिणाम निकलता है।









