सोशल संवाद/डेस्क : अध्यक्ष आपने मुझे बोलने का अवसर दिया मैं आपका बहुत आभार व्यक्त करता हूं। क्योंकि माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में वह अभिभाषण केवल योजनाओं की सूची नहीं था। वह अभिभाषण सरकार के गवर्नेंस इंटेंट को दिखाता है। वह भाषण दिखाता है कि सरकार दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ छोटे, मजबूत, सधे हुए कदमों से अपना लक्ष्य पाने के लिए आगे बढ़ रही है। और वॉर फुटिंग पर मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उनके सभी विधायक, सभी ब्यूरोक्रेट मिल-जुलकर ईमानदारी के साथ दिल्ली में परिवर्तन लाने के लिए काम कर रहे हैं।
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माननीय अध्यक्ष, मैं अभिभाषण पर ही बात करना चाहता था मगर पिछले 5-7 मिनट में मुझे कुछ सच्चाई बताने के लिए मजबूर कर दिया है। आम आदमी पार्टी के लोगों ने लूज बॉल फेंक दी है। विपक्षी बेंच भी मैनिफेस्टो की बात करते हैं। मगर कादयान साहब, शायद आप उस समय आम आदमी पार्टी में थे या नहीं मुझे पता नहीं। 70 सूत्रीय एजेंडा निकला था 70 विधानसभाओं का। 2 लाख रोजगार देने की बात थी, लास्ट माइल कनेक्टिविटी की बात थी, अन्य बहुत सारी बातें थीं। उसके बाद 70 सूत्रीय एजेंडा गुम हो गया। फिर ये 10 बिंदु आ गए। 10 बिंदु कहते हैं की हम प्रदूषण को कम कर देंगे।2 करोड़ पेड़ लगाएंगे।आपने तो 5 करोड़ बता दिया था। यमुना नदी की सफाई और उसको पुनर्जीवित करेंगे। यमुना बिल्कुल स्वच्छ बह रही है! आप तो 5 साल पहले ही करके गए थे, 11 महीने पहले आप करके हाँ, 11 महीने, मुझे पता है।

और मुझे आपके जैसे ही आपकी पार्टी के कुछ लोगों ने बताया है, आप सब उन पुराने नेताओं से ऊब चुके हो। इसीलिए उनके 10 साल के कच्चे चिट्ठे यहाँ तुम खोलते हो। इसीलिए बताते हो “हम 11 साल लगे रहे गाल बजा-बजाकर, हम नहीं कर पाए यमुना साफ। मगर ऑडेसिटी ये है, माननीय अध्यक्ष ऑडेसिटी ये है, 10 महीने में पूछते हैं। कहते हैं “उपराज्यपाल जी के हाथ में आपने कागज लिख के दे दिए।” पिछले 11 साल तो उपराज्यपाल जी लंदन से कागज मंगाकर पढ़ते थे, ये नहीं देते थे! इनका मंत्रिमंडल नहीं देता था! इतना अर्बन नक्सल्स की इतनी बड़ी पहचान है ये! आप कहाँ से बना के देते थे? आपके कागज उपराज्यपाल अभिभाषण उपराज्यपाल को आपकी सरकार नहीं लिख के देती थी? केवल झूठ बोलो, झूठ बोलो, झूठ बोलो और भाग जाओ।
अरविंद केजरीवाल जी झूठ बोल के भाग गए कि दिल्ली के शिक्षक कुत्तों की गिनती करने पे लगाए हैं। मैं बार-बार पूछ रहा हूँ माफ़ी माँगो, माफ़ी माँगो। आतिशी जी बोल के भाग गईं, सदन से ही गायब हो गईं। इसलिए मैं ये सब बातें करना नहीं चाहता था । तो थोड़ा आईना दिखाना कभी-कभी जरूरी होता है। आदमी को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।
माननीय अध्यक्ष जी, मैं मूल विषय पर आता हूँ। आदरणीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में जो उपराज्यपाल का अभिभाषण हमारे समक्ष आया है, वो डिलीवरी ओरिएंटेड गवर्नेंस का डॉक्यूमेंट है। जिसने 11 महीने में प्रोसेस सिंपलीफिकेशन, अप्रूवल टाइमलाइन्स और एडमिनिस्ट्रेटिव रिस्पांसिंवनेस पर बड़ा काम हुआ है। बहुत सारे ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस (ease of doing business) के काम हुए हैं। पुलिस की लाइसेंसिंग से लेकर और बहुत सारे लाइसेंसिंग के कामों में सुविधा देने का काम इस मात्र 10 महीने के समय में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में हुआ है।
पिछली सरकार में बहुत समय तक जे.जे. क्लस्टर्स और स्लम्स को को वोट पाने के लिए अपनी पी.आर. चमकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। आदरणीय अध्यक्ष जी, वो भी कालखंड इस दिल्ली विधानसभा के सदन ने देखा है। दिल्ली विधानसभा के पटल पर देखा गया है जब ड्युसिब (DUSIB) का बजट—उन झुग्गी-झोपड़ी जिनके नाम पर आज राजनीति करते हैं जब फेसलिफ्ट करना होता है अपने शीशमहल को छुपाना होता है, अपने शीशमहल दिल्ली और चंडीगढ़ वाले को छुपाना होता है तो झुग्गी-झोपड़ी की बात करने के लिए आ जाते हैं। दिल्ली ने देखा है ड्युसिब का बजट । रात को 31 मार्च को 11:55 पर जारी किया और 12:00 बजे बजट लैप्स हो गया,। ₹1 भी झुग्गियों में खर्च नहीं हुआ ये ऑन रिकॉर्ड (on record) है।
और इस 11 महीने के कालखंड में आदरणीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में झुग्गी-झोपड़ियों में काम के साथ-साथ जिन टॉयलेट्स को बनाने के लिए, उन झुग्गियों की माताओं-बहनों के सम्मान के लिए आज तक इन्होंने बाथरूम (स्नानगृह) नहीं बनवाए, उनको बनवाने तक का बजट पास हुआ और काम बहुत तेजी के साथ चल रहा है।
बार-बार साहब कह रहे थे अटल कैंटीन। एक पुराने जमाने की विज्ञापन को मैं बहुत बार कोट कर चुका हूँ साहब। एक पिक्चर में दिखाया था ‘चश्मे बद्दूर’ में। उस जमाने में चलता था तेरी कमीज मेरी कमीज से सफेद कैसे? तो ऐड में दिखाता है वो पान खाते हुए थूक देता है ले, तेरी कमीज भी गंदी कर दी। ये वैसे लोग हैं। ये किसी की सफेद कमीज देख ही नहीं सकते, किसी के बसते हुए घर को देख ही नहीं सकते।
अटल कैंटीन, आपके पास 11 साल थे, सेवा कार्य आप कर सकते थे। आपने भी सेवा की। आपने बड़े-बड़े ठेकेदारों की सेवा की पीडब्ल्यूडी घोटाले के नाम पर। आपने बड़े-बड़े शीशमहल बनाकर सेवा की। आपने भी अपने तरीके की सेवा की, कोई बुराई नहीं।मगर हमने इन 11 महीने में 25 दिसंबर से लेकर 8 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन क्रमशः 25 दिसंबर को 17,587, 26 दिसंबर को 20,821,27 को 25,000, 28 को 25,000,29 को 25,000, 6 तारीख को 27,000, 5 तारीख को 27,000,7 तारीख को 27,000 प्लस,8 तारीख को 27,000 प्लस कुल 3,76,779 लोगों ने हमारी इन अटल कैंटीन्स पे भोजन खाया है।
आप केवल-केवल गालियां देते रहिए, खूब ढूंढिए। जाकर ढूंढिए यहाँ थोड़ा सा खाना गिरा रह गया। ये करिए, बहुत अच्छा करिए, खूब करते रहिए। और हम उसपे नजर हटाकर अपना काम करते रहेंगे क्योंकि हम, हम सेवा के लिए चुन के आए हैं। उपराज्यपाल के अभिभाषण में ये बात बताई गई । एक मजदूर जाने से पहले बेचारा दो दिन का खाना बना के रख के जाता है। उसको दो वक्त का गरम खाना, पौष्टिक खाना मिलना आपको पचेगा नहीं साहब! आप तो शीशमहल में खाने वाले हैं। आपको कहाँ अटल अटल कैंटीन का खाना पचेगा।
इसके अतिरिक्त शीश महल कौन सा आप के विधायकों ने देखा। हमें भी नहीं दिखाया। हमने तो टीवी में देखा। कुछ विधायक बता रहे थे आप में से तो किसी को सौभाग्य भी नहीं मिला था सचिवालय में जाकर मुख्यमंत्री के कार्यालय को देख लेते। वो भी अब मिला है तुम में से कोई मुख्यमंत्री के पास गया है । 11 महीने में ये परिवर्तन हो गया तुम्हारे जीवन में। विधायक को मुख्यमंत्री के कार्यालय में जाने का मौका अब मिला 11 महीने में। इन बेचारों के लिए तो ये अच्छी सरकार है जो कम से कम मुख्यमंत्री कमरे में तो आना पड़ रहा है। इसीलिए तो ये बार-बार आके कहते हैं, सारी पोल पट्टी खोलते हैं। ये चाहते हैं उनकी रिटायरमेंट में आप इनका सहयोग कर दो।
सदन में बहुत व्यापक परिवर्तन हुए हैं। इन्होंने तो आज भी बड़ी कोशिश की थी साहब, इनके द्वारा पालित-पोषित NGOs के माध्यम से बड़ी कोशिश की थी कोर्ट में जाकर स्टे लाने की। मगर ‘जाको राखे साइयां मार सके ना कोय’। कोर्ट ने स्टे देने से मना किया, आगे न्यायालय जो निर्णय करेगा । जो ये स्कूलों के नामों के बारे में कह रहे हैं उस पर भी थोड़े समय में जब मौका आएगा आगे आपको जवाब देंगे बहुत अच्छी तरह से। आपका आईना फिर आपको भी शीशा दिखाया जाएगा बहुत अच्छी तरह से शीशा दिखाया जाएगा।
सरकार का गवर्नेंस का इंटेंट है, एक प्रोसेस को सेट किया गया है। रोज-रोज फीस के लिए भागना, रोज-रोज हड़तालें करवाना, ये गवर्नेंस मॉडल था पिछले 11 साल का। मैं यहाँ बड़े फक्र के साथ कहता हूँ आदरणीय रेखा गुप्ता जी के नेतृत्व में दिल्ली की सरकार के लिए 18 लाख सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सब बच्चे हमारे हैं। हर बच्चे की well-being, हर बच्चे की mental, financial, emotional stability ये हमारा काम है। हम मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में 11 महीने में उसे संरक्षित करने में सफल हुए हैं और उपराज्यपाल जी का अभिभाषण इस बात को परिलक्षित करता है।
सबसे बड़ी बात समझने की ये है की 11 महीने पहले के दृश्यों को याद करिए। आदरणीय सदस्य जो यहाँ मेरी बात सुन रहे हैं वो सब याद करिए दिल्ली में क्या होता था? दिल्ली में सड़कों पे कूड़ा पड़ा रहता था और मेरे सफाई कर्मचारी भाई-बहन हड़ताल पे रहते थे, तनख्वाह नहीं मिलती थी। दिल्ली में केजरीवाल जी ABP न्यूज़ जैसे किसी चैनल पर बैठकर दिवाली मनाते थे अपने परिवार के साथ। 12 कॉलेजों के शिक्षक उनके non-teaching staff अपने कॉलेजों के बाहर भूख हड़ताल पर बैठते थे महीनों तनख्वाह नहीं मिलती थी ।
11 महीने में सरकार ने वो प्रोसेस set right कर दिया। अब नगर निगम को सरकार ये नहीं कहती कि तेरे लिए बजट नहीं है। ये कहते हैं सरकार ने क्या बदल दिया? अब नगर निगम और दिल्ली सरकार में लड़ाई नहीं है। हम जिम्मेदारी लेते हैं, हम नहीं कहते कि नगर निगम फलाने की है, ढिकाने की है। हम दिल्ली के रखवाले के रूप में, दिल्ली के सेवक के रूप में चुन के आए हैं और मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में हमने पैसा भी दिया है, राजनीतिक इंटेंट भी दी है और करके दिखाया है।
कॉलेजों के पैसे के बारे में, क्या दिल्ली सरकार की जेब में फालतू पैसा आ गया? केवल राजनीतिक इंटेंट के साथ काम हुआ है, गवर्नेंस की इंटेंट के साथ काम हुआ है। हर कॉलेज को पैसा दिया गया है। आप जानकर हैरान होंगे माननीय सदस्यों मैं आपके समक्ष आज बताना चाहता हूँ, इस सरकार ने 11 साल में उन कॉलेजेस की रिपेयर की, बिल्डिंग की रिपेयर के लिए एक रुपया जारी नहीं किया था। हमने grant-in-aid के सारे प्रोसेस को बिल्कुल ठीक कर दिया और हमने कोई एहसान नहीं किया है, हमने restoration of rights किया है। नगर निगम और दिल्ली की जनता का right है ये, हमने उसको रिस्टोर करके दिखाया है।
हायर एजुकेशन के फील्ड में जो एलजी साहब ने अपने अभिभाषण में मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में पढ़कर बताया। बताया किस तरीके से एडुसिटी के बारे में काम हुआ है, कांवड़ यात्रा के संदर्भ में हमारी सरकार ने बड़ा काम किया है। और मुझे आप सबको ये बताते हुए बहुत खुशी होती है एलजी साहब ने भी अपने अभिभाषण में जिक्र किया। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में पावर विभाग ने अगले 4 साल का पावर मास्टर प्लान बनाया है 17,000 करोड़ रुपये की लागत से। आप सबकी विधानसभाओं में आने वाले समय में डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को पूरा करने का, सुदृढ़ करने का काम सरकार करने जा रही है।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ। दिल्ली की जनता आज इस पवित्र सदन के माध्यम से आदरणीय मुख्यमंत्री जी को सुनना चाहती है। उनके 11 महीने के कार्यकाल में उपराज्यपाल जी ने जो उपलब्धियां बताई उनके संदर्भ में, उनके प्रभावशाली नेतृत्व, उनके गवर्नेंस इंटेंट, उनके कठोर निर्णय की क्षमता, उनकी वो क्षमता जिसने गवर्नेंस को मजबूत करने के साथ-साथ एडमिनिस्ट्रेशन को set right करने के लिए भ्रष्टाचारियों को सस्पेंड करने का काम भी किया। मगर उसमें भी भ्रष्टाचारियों के साथ खड़े होकर हमारे विपक्षी दलों ने भ्रष्टाचार को बढ़ाने की कोशिश की। कहाँ चले गए अचानक वो कैमरे? कहाँ चले गए अचानक वो मोबाइल जो कहते थे फोटो ले लेना, कितने वीडियो बने? ये एक महिला मुख्यमंत्री का इंटेंट था, हिम्मत थी, जो खड़े पैर तीन भ्रष्टाचारियों को एक मिनट में सस्पेंड करके दिल्ली में कानून के राज को खड़ा करने का सवाल किया।
आपने मुझे बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद।”










