सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड के कलाकारों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार के सांस्कृतिक कार्य निदेशालय (पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग) ने बुजुर्ग, गंभीर रूप से अस्वस्थ और स्थायी रूप से दिव्यांग कलाकारों के लिए ‘मासिक निवृत्तिका योजना’ के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं।
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वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए चयनित कलाकारों को हर महीने ₹4,000 की सम्मान राशि दी जाएगी।
योजना का उद्देश्य
सांस्कृतिक कार्य निदेशालय के निदेशक आसिफ एकराम के अनुसार, “इस योजना का मुख्य उद्देश्य उम्र या खराब सेहत के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे कलाकारों को संबल और सम्मान देना है, ताकि वे अपनी जिंदगी गरिमा के साथ जी सकें।”
यह योजना खास तौर पर उन कलाकारों के लिए बनाई गई है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और अब सक्रिय रूप से कला कार्य नहीं कर पा रहे।
झारखंड योजना क्यों है खास?
अन्य राज्यों और केंद्र सरकार की योजनाओं की तुलना में झारखंड की यह पहल ज्यादा लाभकारी मानी जा रही है:
- कोई आयु सीमा नहीं:
- केंद्र सरकार: 60 वर्ष
- बिहार: 50 वर्ष
- झारखंड: दिव्यांग या गंभीर बीमार कलाकारों के लिए कोई उम्र सीमा नहीं
- अधिक आर्थिक सहायता:
- झारखंड: ₹4,000 प्रति माह
- बिहार: ₹3,000 प्रति माह
- सरल आवेदन प्रक्रिया:
केंद्र की तुलना में यहां कम कागजी कार्रवाई और स्थानीय स्तर पर आवेदन जमा करने की सुविधा है।
आवेदन की अंतिम तिथि
👉 31 जुलाई 2026 तक आवेदन किया जा सकता है।
कैसे करें आवेदन?
इच्छुक कलाकार निम्न प्रक्रिया का पालन करें:
- आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन फॉर्म डाउनलोड करें:
👉 www.jharkhandculture.com - फॉर्म को सही तरीके से भरें
- सभी जरूरी दस्तावेज संलग्न करें
- आवेदन को सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, रांची में जमा करें
आवश्यक दस्तावेज
- कला क्षेत्र (संगीत, नृत्य, पेंटिंग, थिएटर आदि) का विवरण
- उपलब्धियां और पुरस्कार प्रमाण पत्र
- झारखंड निवासी प्रमाण पत्र
- आयु प्रमाण पत्र
- वार्षिक आय प्रमाण पत्र
- बैंक खाता विवरण
- पहचान पत्र (आधार/अन्य)
- चिकित्सा प्रमाण पत्र (यदि अस्वस्थ/दिव्यांग)
योजना के प्रमुख लाभ
1. आर्थिक सुरक्षा
हर महीने मिलने वाली ₹4,000 की राशि कलाकारों की दैनिक जरूरतों और दवाइयों में मदद करेगी।
2. सम्मान और पहचान
यह केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि कलाकारों के जीवनभर के योगदान का सम्मान है।
3. पारदर्शिता
सीधे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर होने से बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है।










