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झारखंड विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर गरमागरम बहस: वंदे मातरम से लेकर जल, जंगल, जमीन तक के छाए रहे मुद्दे

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/रांची : झारखंड विधानसभा के मौजूदा सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर गरमागरम बहस देखने को मिली. झामुमो की ओर से विधायक हेमलाल मुर्मू ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया. सत्ता पक्ष ने सरकार के कामकाज को गंभीरता से लेने का दावा करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार किसी तरह का सपना नहीं दिखा रही, बल्कि राज्य की आधी आबादी को मजबूत करने के लिए काम कर रही है, जिसका अनुसरण दुनिया के कई देश कर रहे हैं. कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने भी इस चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि यदि लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी सरेंडर हैं, तो यहां नेता प्रतिपक्ष सरेंडर हैं. उन्होंने भाजपा पर राज्य को अस्त-व्यस्त करने में जुटी रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा को अपना चश्मा बदलना पड़ेगा, तभी उन्हें सच दिखेगा. सत्ता पक्ष ने यह भी दावा किया कि भाजपा मुंगेरीलाल के सपने देख रही है, जो कभी पूरे नहीं होंगे.

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इस दौरान वंदे मातरम राष्ट्रगीत को लेकर भी सदन में बहस छिड़ी. गृह विभाग द्वारा राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम बजाने और उसके सम्मान में खड़े होने के आदेश जारी किए जाने पर चर्चा हुई. सत्ता पक्ष ने बताया कि वंदे मातरम के कुछ छंदों पर विवाद है, जिसकी वजह से मुस्लिम लीग ने कई लाइनें हटा दी थीं, क्योंकि इस्लाम धर्म में मां दुर्गा को गाना सही नहीं माना जाता. वहीं, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सदन के अंदर किसी भी सदस्य ने अभिभाषण पर चर्चा नहीं की, बल्कि किसी ने वंदे मातरम तो किसी ने प्रधानमंत्री पर चर्चा की. उन्होंने वंदे मातरम गीत के लिए एक दिन विशेष चर्चा कराने की मांग की. मरांडी ने मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा कभी नहीं हुआ होगा कि राज्य के मुख्यमंत्री 15 अगस्त और 26 जनवरी को राज्य से भी बाहर रहें, लेकिन यहां तो मुख्यमंत्री देश से ही बाहर थे. उन्होंने सदन में आए ‘एप्स्टीन फाइल’ के नाम को स्पंज करने की भी मांग की.

बाबूलाल मरांडी ने झारखंड के मूल मुद्दों, विशेषकर जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि झारखंड के महापुरुषों ने राज्य की लड़ाई जमीन के लिए लड़ी थी और आज भी हमारे लोग जल, जंगल, जमीन की लड़ाई लड़ रहे हैं. मरांडी ने जसीडीह का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोगों को उजाड़ा जा रहा है. उन्होंने सरकार से आदिवासियों के दर्द को समझने और खाली पड़ी जमीन पर कारखाने लगाने का निर्णय लेने का आग्रह किया. मरांडी ने आरोप लगाया कि आदिवासी मूलवासियों को माइनिंग के नाम पर उजाड़ा जा रहा है, जबकि जमीन ही उनके जीविकोपार्जन का मुख्य स्रोत है. उन्होंने सरकार से भारत सरकार को जितना कोसना है कोसने, लेकिन राज्य के आदिवासियों के लिए काम करने की अपील की. बहस के बाद सदन की कार्यवाही को बाद में 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

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