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अफगानिस्तान में नया कानून: घरेलू हिंसा को छूट, महिलाओं पर बढ़ा दमन

By Aditi Pandey

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NEW LAW OF TALIBAN exemption for domestic violence अफगानिस्तान
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सोशल संवाद/डेस्क: अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। तालिबान शासन ने एक नया आपराधिक कानून लागू किया है, जिसने महिलाओं के अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इस कानून के तहत पति को पत्नी और बच्चों को शारीरिक दंड देने की अनुमति दी गई है, बशर्ते चोट से हड्डी न टूटे या खुला घाव न बने। यानी गंभीर चोट के बिना की गई पिटाई को अपराध की श्रेणी में सख्ती से नहीं रखा गया है। बताया जा रहा है कि इस कानून पर तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के हस्ताक्षर के बाद इसे लागू किया गया।

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नियमों के अनुसार, अगर महिला को स्पष्ट चोट या फ्रैक्चर होता है, तब भी आरोपी पति को अधिकतम 15 दिन की सजा हो सकती है। लेकिन सजा तभी संभव है जब पीड़िता अदालत में हिंसा साबित कर सके। अदालत में महिला को पूरी तरह ढके हुए अपने घाव दिखाने होंगे और उसके साथ पति या कोई पुरुष अभिभावक की मौजूदगी जरूरी होगी। दूसरी ओर, यदि कोई विवाहित महिला पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों के घर जाती है, तो उसे तीन महीने तक की जेल का सामना करना पड़ सकता है।

कानून का एक अन्य प्रावधान समाज को चार वर्गों उलेमा, उच्च वर्ग, मध्यम वर्ग और निचले वर्ग में बांटता है। अपराध की सजा अब उसकी गंभीरता से ज्यादा आरोपी की सामाजिक स्थिति पर निर्भर करेगी। धार्मिक विद्वानों को केवल नसीहत, उच्च वर्ग को सलाह, मध्यम वर्ग को जेल और निचले वर्ग को जेल के साथ शारीरिक दंड का प्रावधान बताया जा रहा है।

ब्रिटिश मीडिया संस्थान The Independent की रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार समूहों का कहना है कि लोग इस कानून के खिलाफ खुलकर बोलने से डर रहे हैं, क्योंकि इस पर चर्चा करना भी अपराध घोषित किया गया है। अफगान मानवाधिकार संगठन रवादारी ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की अपील की है।

संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि रीम अलसालेम ने भी इस कानून को महिलाओं और लड़कियों के लिए बेहद खतरनाक बताया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर ठोस कदम उठाएगा, और अगर हां, तो कब।

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