सोशल संवाद/डेस्क: झारखंड में अवैध कब्जे और फर्जी जमीन सौदों पर अब न्यायपालिका का रुख और कड़ा हो गया है। Jharkhand High Court ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि कमेटियों के गठन से नहीं, बल्कि ज़मीनी कार्रवाई से परिणाम दिखने चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश M.S. Sonak और जस्टिस राजेश शंकर की पीठ ने पूछा कि जब अवैध कब्जों को रोकने के लिए अब तक मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार ही नहीं हुई, तो उसकी समीक्षा के लिए नई कमेटी बनाने का औचित्य क्या है? अदालत ने मुख्य सचिव से विस्तृत जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी।
मामला तब और गंभीर हो गया जब Supreme Court of India के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस इकबाल की जमीन पर कब्जे की कोशिश सामने आई। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया।
उधर रांची में बहुचर्चित Rajendra Institute of Medical Sciences जमीन बिक्री मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने वर्तमान और पूर्व अंचल अधिकारियों सहित कई लोगों को नोटिस भेजा है। शुरुआती जांच में अधिग्रहित जमीन पर अवैध रजिस्ट्री और संभावित मिलीभगत के संकेत मिले हैं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार एसओपी पर कब तक स्पष्ट समयसीमा देती है और एसीबी की जांच के बाद क्या बड़ी कार्रवाई सामने आती है। झारखंड में जमीन विवादों पर कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है।










